प्रीपेड स्मार्ट मीटर विवाद: 23 अप्रैल को 75 जिलों में आंदोलन, व्यापारियों की “शव यात्रा” से बढ़ेगा दबाव

मेरठ में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध तेज हो गया है, जहां 23 अप्रैल को पूरे उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में व्यापारी प्रदर्शन करेंगे। मेरठ में “शव यात्रा” निकालने की तैयारी है। व्यापार मंडल अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने बढ़े बिल, तकनीकी खामियों और जबरन मीटर लगाने को लेकर नाराज़गी जताई है। यह विवाद अब जनआंदोलन बनता जा रहा है, जिससे सरकार पर नीति में बदलाव का दबाव बढ़ सकता है।

लोकेश कुमार अग्रवाल, प्रांतीय अध्यक्षः उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश (रजि0)

मेरठ में प्रीपेड स्मार्ट मीटर विवाद: 23 अप्रैल को 75 जिलों में आंदोलन, व्यापारियों की “शव यात्रा” से बढ़ेगा दबाव

मेरठ/लखनऊ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि।  उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती नाराज़गी अब बड़े आंदोलन में बदलती नजर आ रही है। अप्रैल 2026 में व्यापारी वर्ग खुलकर विरोध में उतर आया है और 23 अप्रैल को पूरे प्रदेश के 75 जिलों में धरना-प्रदर्शन की घोषणा की गई है। मेरठ में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है, जहां व्यापारियों ने “शव यात्रा” निकालकर अपनी नाराज़गी जताने की तैयारी की है। इस आंदोलन का नेतृत्व उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल कर रहे हैं, जिन्होंने इस योजना की कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है।

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प्रीपेड स्मार्ट मीटर विवाद की पृष्ठभूमि और विस्तार

प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को सरकार ने बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लागू किया है। इसके तहत उपभोक्ताओं को पहले से बिजली के लिए भुगतान करना होता है। हालांकि मेरठ में प्रीपेड स्मार्ट मीटर विवाद अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जनआक्रोश का रूप ले चुका है। व्यापारियों, ग्रामीणों और आम उपभोक्ताओं का आरोप है कि यह योजना जमीनी स्तर पर उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है। बिना सहमति मीटर लगाए जाने और बढ़ते बिजली बिलों ने लोगों में अविश्वास पैदा कर दिया है।

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लोकेश अग्रवाल का बयान और 23 अप्रैल का आंदोलन

उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि 23 अप्रैल को प्रदेश के सभी 75 जिलों में व्यापारी विद्युत विभाग के कार्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। मेरठ में यह प्रदर्शन विशेष रूप से बड़ा होगा, जहां व्यापारी प्रतीकात्मक “शव यात्रा” निकालेंगे।

उन्होंने बताया कि यह “शव यात्रा” स्मार्ट मीटर योजना की खामियों के खिलाफ जनभावनाओं को दर्शाने का माध्यम होगी। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि कई मामलों में उपभोक्ताओं द्वारा अग्रिम भुगतान करने के बावजूद बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है, जिससे व्यापार और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित होते हैं।

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प्रीपेड स्मार्ट मीटर की प्रमुख खामियां

मेरठ में प्रीपेड स्मार्ट मीटर विवाद के पीछे कई गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि रिचार्ज खत्म होते ही बिजली तुरंत बंद हो जाती है, जिससे घरों और दुकानों में कामकाज ठप हो जाता है। इसके अलावा, मीटर रीडिंग और बिलिंग में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि बिना उपयोग के भी बैलेंस कट जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क और तकनीकी सुविधाओं की कमी के कारण रिचार्ज करने में दिक्कतें आती हैं। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है और लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोकेश अग्रवाल ने यह भी आरोप लगाया कि पीवीवीएनएल अधिकारियों द्वारा कई जगहों पर जबरन मीटर लगाए जा रहे हैं और शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।

आम लोगों और व्यापारियों पर प्रभाव

इस विवाद का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। मेरठ जैसे व्यापारिक शहर में बिजली की अनिश्चितता व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। छोटे दुकानदारों को बार-बार रिचार्ज करना पड़ रहा है, जिससे उनकी नकदी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी यह व्यवस्था आर्थिक दबाव बढ़ा रही है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनकी आय सीमित है।

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