मेरठ में उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने जनगणना 2026 की ड्यूटी को लेकर जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को पृथक ज्ञापन सौंपे हैं। संघ ने गंभीर बीमारियों, गर्भावस्था और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों को जनगणना कार्य से मुक्त रखने की मांग की है। साथ ही उचित मानदेय और प्रतिकर अवकाश की भी अपील की गई है, ताकि शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्वों के बीच उचित संतुलन बना रहे।
मेरठः महिला शिक्षकों ने जनगणना डयूटी में आ रहीं समस्याएं डीएम-बीएसए के सामने रखीं
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की मेरठ इकाई ने जनगणना 2026 के कार्यों में शिक्षकों की तैनाती से जुड़ी व्यवहारिक जटिलताओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ के पदाधिकारियों ने इस संबंध में जनपद के जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर अपनी सात सूत्रीय मांगों पर त्वरित और सहानुभूतिपूर्वक कार्रवाई की अपील की है।
शिक्षकों की व्यवहारिक चुनौतियां
राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में जनगणना एक आधारभूत स्तंभ है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को अग्रिम पंक्ति में खड़ा करना सदैव से एक विवादास्पद विषय रहा है। मेरठ में उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ की जिला अध्यक्ष शशि कौशिक के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापनों में इस बात पर गहरा बल दिया गया है कि शिक्षकों की पहली प्राथमिकता विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया गया कि जनगणना 2026 के कार्यों का वर्तमान स्वरूप शिक्षकों की मूल शैक्षणिक जिम्मेदारियों में भारी व्यवधान उत्पन्न कर रहा है। विशेष रूप से महिला शिक्षकों के लिए, जो घर की दहलीज और स्कूल की चारदीवारी के बीच संतुलन बनाती हैं, क्षेत्र में जाकर गणना करना शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यधिक थकाऊ साबित हो रहा है।
सात सूत्रीय मांग पत्र: मानवीय संवेदनाओं की पुकार
शिक्षक संघ द्वारा सौंपे गए इन ज्ञापनों में उन परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है, जहाँ शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से छूट मिलनी अनिवार्य है। संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि दिव्यांग शिक्षकों, असाध्य रोगों से पीड़ित कर्मियों और उन महिला शिक्षकों को, जो गर्भवती हैं या जिनके छोटे बच्चे हैं, इस कार्य से पूर्णतः मुक्त रखा जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि विपरीत परिस्थितियों में काम करने से न केवल कर्मचारी का मनोबल गिरता है, बल्कि कार्य की शुद्धता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े वरिष्ठ शिक्षकों को राहत देने की मांग की गई है ताकि वे अपने सेवाकाल के अंतिम वर्षों को गरिमा और स्वास्थ्य के साथ पूर्ण कर सकें। जिलाधिकारी और बीएसए को दिए गए पत्रों में उचित मानदेय, सुरक्षा और प्रतिकर अवकाश (Compensatory Leave) जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी पुरजोर वकालत की गई है।
निष्कर्ष
जनगणना 2026 का कार्य राष्ट्र के लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण हमारे शिक्षकों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी है। जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपे गए अलग-अलग ज्ञापन इस बात की पुष्टि करते हैं कि अब शिक्षक अपनी समस्याओं को लेकर संगठित और सजग हैं। शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रखते हुए प्रशासनिक लक्ष्यों को प्राप्त करना तभी संभव है जब कर्मचारियों की उचित मांगों को सम्मान दिया जाए। यह समय है जब शासन और प्रशासन को सहानुभूतिपूर्वक विचार कर एक ऐसा पारदर्शी ढांचा तैयार करना चाहिए, जिसमें राष्ट्र कार्य भी संपन्न हो और शिक्षा की पवित्रता भी खंडित न हो।

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