परीक्षितगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण: अखिल विद्या समिति ने मेरठ में छेड़ा जागरूकता अभियान

मेरठ के परीक्षितगढ़ में अखिल विद्या समिति द्वारा ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। समिति के अध्यक्ष विष्णु अवतार रुहेला के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने प्राचीन स्थलों को अतिक्रमण और उपेक्षा से बचाने का संकल्प लिया। लेख में स्पष्ट किया गया है कि इन धरोहरों का संरक्षण न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान के लिए आवश्यक है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

परीक्षितगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण: अखिल विद्या समिति ने मेरठ में छेड़ा जागरूकता अभियान

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। ऐतिहासिक नगरी परीक्षितगढ़ में अखिल विद्या समिति के नेतृत्व में प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा और उनके गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए एक वृहद जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें स्थानीय नागरिकों ने अपनी विरासत को सहेजने का सामूहिक संकल्प लिया।

प्राचीन विरासत और हमारी सामूहिक उत्तरदायित्व

मेरठ जनपद का परीक्षितगढ़ क्षेत्र न केवल पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के कई स्वर्णिम अध्यायों को अपने भीतर समेटे हुए है। अखिल विद्या समिति द्वारा आयोजित यह हालिया कार्यक्रम उस समय अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है जब आधुनिकता की दौड़ में हमारी प्राचीन इमारतें और सांस्कृतिक प्रतीक उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से समिति ने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनमानस को भी यह संदेश दिया है कि ये धरोहरें केवल ईंट-पत्थर के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये हमारी जड़ें हैं। कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि यदि हम अपनी जड़ों से कट गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली पहचान को कभी नहीं जान पाएंगी। परीक्षितगढ़ का किला और यहाँ स्थित अन्य प्राचीन स्थल न केवल वास्तुकला के नमूने हैं, बल्कि ये उस कालखंड के गवाह हैं जिसने भारतीय सभ्यता को आकार दिया।

अखिल विद्या समिति का संरक्षण विजन और जागरूकता

अखिल विद्या समिति के अध्यक्ष विष्णु अवतार रुहेला ने इस अभियान के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संरक्षण केवल सरकार या पुरातत्व विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक जन-आंदोलन होना चाहिए। समिति का संकल्प है कि परीक्षितगढ़ के प्रत्येक ऐतिहासिक स्थल को अतिक्रमण और क्षरण से मुक्त कराया जाए। इसके लिए उन्होंने युवाओं की भागीदारी पर विशेष बल दिया है। जब युवा पीढ़ी अपनी धरोहरों के प्रति संवेदनशील होगी, तभी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि धरोहरों के आसपास फैली गंदगी और अवैध कब्जे न केवल ऐतिहासिक मूल्य को कम करते हैं, बल्कि एक पर्यटन केंद्र के रूप में क्षेत्र की छवि को भी धूमिल करते हैं। इस अवसर पर पूनम रुहेला और स्वाति चौधरी जैसे प्रमुख समाजसेवियों ने भी महिलाओं और छात्राओं को इस अभियान से जोड़कर इसे एक सामाजिक चेतना का रूप दिया।

भविष्य की संभावनाएं और स्थानीय संदर्भ

मेरठ जिला अपनी क्रांति और संस्कृति के लिए विख्यात है। हस्तिनापुर के निकट होने के कारण परीक्षितगढ़ का महत्व और भी बढ़ जाता है। भविष्य में इस प्रकार के जागरूकता अभियानों से यह संभावना प्रबल होती है कि राज्य सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का ध्यान इन उपेक्षित स्थलों की ओर जाएगा। इससे न केवल स्मारकों का जीर्णोद्धार होगा, बल्कि यहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार होगा। स्थानीय स्तर पर संजीव गर्ग, जनार्दन अग्रवाल और प्रमोद प्रजापति जैसे जागरूक नागरिकों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि व्यापारी और बुद्धिजीवी वर्ग भी अब अपनी विरासत के प्रति गंभीर है। भविष्य में इस अभियान को स्कूलों और कॉलेजों तक ले जाने की योजना है, जिससे 'विरासत मित्र' जैसी अवधारणा को बल मिलेगा और हर नागरिक अपनी प्राचीन संपदा का पहरेदार बनेगा।

निष्कर्ष

अखिल विद्या समिति का यह संकल्प मेरठ के सांस्कृतिक मानचित्र पर परीक्षितगढ़ को एक नई पहचान दिलाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत सांस्कृतिक नींव रखना है। यह आवश्यक है कि समाज का हर वर्ग अपनी संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर इन अमूल्य निधियों की रक्षा के लिए आगे आए। प्रशासन को भी चाहिए कि वह ऐसी जन-पहल को अपना समर्थन दे और अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाए। यदि आज हम अपनी विरासत को बचाने में सफल रहे, तो निश्चय ही परीक्षितगढ़ आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से एक होगा।

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