सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पुराने आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है और सरकारें इस समस्या पर निष्क्रिय नहीं रह सकतीं। अदालत ने अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए कुत्तों को आश्रय केंद्रों में रखने के निर्देश बरकरार रखे। फैसले के बाद राज्यों और नगर निकायों पर पशु आश्रय केंद्र विकसित करने का दबाव बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सार्वजनिक स्थानों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते, आदेश वापस लेने से इनकार
नई दिल्ली, एजेंसी। देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पुराने आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि नागरिकों को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण में जीवन जीने का अधिकार है तथा सरकारें इस समस्या पर मूकदर्शक नहीं बनी रह सकतीं। अदालत के इस फैसले को देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और शहरी सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की, जिनमें वर्ष 2025 में जारी उस आदेश को संशोधित या वापस लेने की मांग की गई थी, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर आश्रय केंद्रों में रखने के निर्देश दिए गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बिना डर सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए। अदालत ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और यात्रियों पर बढ़ते कुत्तों के हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया।
अदालत ने यह भी कहा कि कई राज्यों और नगर निकायों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त और स्थायी प्रयास नहीं किए। नसबंदी और टीकाकरण अभियान सीमित स्तर पर चलाए गए, जिसके कारण स्थिति लगातार गंभीर होती गई।
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आश्रय केंद्रों में रखने के आदेश पर कायम रही अदालत
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद दोबारा उसी क्षेत्र में छोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे कुत्तों को आश्रय केंद्रों में रखा जाना चाहिए ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस फैसले के बाद अब राज्यों और नगर निगमों पर पर्याप्त संख्या में पशु आश्रय केंद्र विकसित करने का दबाव बढ़ सकता है। अदालत ने संकेत दिए कि यदि स्थानीय प्रशासन आदेशों के पालन में लापरवाही बरतता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
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दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ी थी चिंता
दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में बीते महीनों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं। मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में सुबह-शाम सड़कों और कॉलोनियों में झुंड के रूप में घूमते कुत्तों को लेकर स्थानीय लोग कई बार शिकायतें कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, खुले कूड़े के ढेर और पशु नियंत्रण व्यवस्था की कमजोर निगरानी के कारण यह समस्या और गंभीर हुई है। कई नगर निकायों के पास पर्याप्त आश्रय केंद्र, चिकित्सा सुविधा और प्रशिक्षित कर्मचारी भी नहीं हैं, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा।
पशु प्रेमी संगठनों ने जताई चिंता
अदालत के फैसले के बाद पशु अधिकार संगठनों और पशु प्रेमियों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त आश्रय केंद्र और भोजन व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई तो बड़ी संख्या में कुत्तों को रखने में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। कुछ संगठनों का तर्क है कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद नियंत्रित तरीके से पुनर्वास की नीति अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि अदालत ने फिलहाल सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने आदेश में कोई बदलाव नहीं किया।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल अस्थायी अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि राज्यों और नगर निकायों को स्थायी पशु नियंत्रण व्यवस्था विकसित करनी होगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर प्रशासन अदालत के निर्देशों को किस स्तर तक लागू कर पाता है और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ पशु कल्याण के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।

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