पुणे में जहरीली गैस से मौत: टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत, मृतक उत्तर प्रदेश के

महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक मशरूम इकाई में जहरीली गैस के रिसाव से तीन मजदूरों की मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब एक मजदूर टैंक की सफाई के लिए अंदर गया और वापस नहीं आया, जिसके बाद दो अन्य साथी भी अंदर गए। तीनों को बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मृतक उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी थे। हादसे ने श्रमिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पुणे में जहरीली गैस से मौत: टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत, मृतक उत्तर प्रदेश के 

पुणे, एजेंसी। महाराष्ट्र के पुणे जिले में जहरीली गैस से मौत का एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक मशरूम इकाई में नाली टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की जान चली गई। यह हादसा रविवार शाम को पुरंदर क्षेत्र के बेलसर गांव में हुआ, जब एक के बाद एक तीनों मजदूर टैंक में उतरते गए और बाहर नहीं आ सके। प्रारंभिक जांच में जहरीली गैस से दम घुटना मौत की मुख्य वजह माना जा रहा है।

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जहरीली गैस से मौत: टैंक में उतरते ही बिगड़ी हालत

पुणे के पुरंदर तालुका स्थित बेलसर गांव में यह हादसा उस समय हुआ जब एक मजदूर नाली की लाइन साफ करने के लिए टैंक में उतरा। काफी देर तक बाहर न आने पर दो अन्य साथी उसकी मदद के लिए अंदर गए, लेकिन वे भी बाहर नहीं लौटे। स्थानीय लोगों ने जब स्थिति गंभीर देखी तो तुरंत राहत प्रयास शुरू किए। अर्थमूवर मशीन की मदद से टैंक को खोलकर तीनों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

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अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

घटनास्थल से निकाले जाने के बाद तीनों मजदूरों को तत्काल जेजुरी के ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित रखा है। प्रथम दृष्टया जहरीली गैस के प्रभाव और ऑक्सीजन की कमी को ही मौत की वजह माना जा रहा है।

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मृतक उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी

इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान पिंटू राजेश प्रसाद, व्यास सोहम कुमार और गौतम रामसुरन कुशवाहा के रूप में हुई है। तीनों उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के निवासी थे और रोज़गार की तलाश में महाराष्ट्र आए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से भी बड़ी संख्या में मजदूर ऐसे ही कार्यों में लगे हुए हैं, जिससे यह घटना व्यापक श्रमिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।

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श्रमिक सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

यह हादसा एक बार फिर यह संकेत देता है कि बंद स्थानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे टैंकों में हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जो कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसके बावजूद कई छोटे उद्योगों में सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण की कमी देखी जाती है।

जांच जारी, पुलिस ने दर्ज किया मामला

जेजुरी थाना पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मौत का प्रकरण दर्ज कर लिया है और विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित इकाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुणे में जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमी को उजागर करती है। यदि समय रहते उचित सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण सुनिश्चित नहीं किए गए, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी दोहराए जा सकते हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से बाहर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति और निगरानी की आवश्यकता स्पष्ट रूप से सामने आई है।

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