मेरठ सड़क निर्माण पर उठे सवाल: 55 लाख की परियोजना की गुणवत्ता जांच की मांग, कांग्रेस नेता रंजन शर्मा ने उठाए मुद्दे
मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में शास्त्री की कोठी से भूमिया के पुल तक लगभग 55 लाख रुपये की लागत से बन रही सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने वीडियो संदेश जारी कर निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने गुणवत्ता निगरानी और जनता के धन के उपयोग पर प्रश्न उठाए हैं। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रंजन शर्मा, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष
मेरठ सड़क निर्माण पर उठे सवाल: 55 लाख की परियोजना की गुणवत्ता जांच की मांग, कांग्रेस नेता रंजन शर्मा ने उठाए मुद्दे
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ महानगर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में शास्त्री की कोठी से भूमिया के पुल तक कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर राजनीतिक और जनसामान्य स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। लगभग 55 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही इस सड़क की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस नेताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र और प्रदेश सरकारें आधारभूत ढांचे के विकास और पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बता रही हैं।
वीडियो के माध्यम से रंजन शर्मा, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने सवाल खड़े किये।
ब्रह्मपुरी क्षेत्र की सड़क परियोजना पर बढ़ी निगरानी की मांग
स्थानीय जानकारी के अनुसार शास्त्री की कोठी से भूमिया के पुल तक सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना का निर्माण कार्य सनशाइन नामक कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जबकि ठेकेदार के रूप में आकाश गुप्ता का नाम सामने आ रहा है। निर्माण कार्य अभी जारी है, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं ने दावा किया है कि सड़क के कुछ हिस्सों में गुणवत्ता मानकों को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।
रंजन शर्मा ने वीडियो संदेश में उठाए कई सवाल
कांग्रेस के मेरठ महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने निर्माण स्थल पर जारी एक वीडियो संदेश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि वह मेरठ की जनता की ओर से जानना चाहते हैं कि क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है, क्या जनता के धन का सही उपयोग हो रहा है और क्या संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित रूप से गुणवत्ता की निगरानी कर रहे हैं।
रंजन शर्मा ने यह भी कहा कि जब सरकार विकास और पारदर्शिता की बात करती है तो ऐसे मामलों में जनता को स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासन, नगर निगम और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
आरोपों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग
रंजन शर्मा ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार स्वयं को प्रदेश सरकार के एक मंत्री और कुछ जनप्रतिनिधियों के निकट होने का दावा करता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में मामला आरोप और प्रत्यारोप के दायरे में है तथा इसकी सत्यता केवल आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क परियोजना की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल दृश्य निरीक्षण से नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्माण सामग्री, मोटाई, मिश्रण अनुपात और तकनीकी मानकों की प्रयोगशाला जांच आवश्यक होती है। इसलिए यदि किसी परियोजना पर सवाल उठ रहे हैं तो तकनीकी परीक्षण सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बढ़ी संवेदनशीलता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से मेरठ में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। ऐसे में नागरिकों की अपेक्षा भी बढ़ी है कि विकास कार्य केवल कागजों पर नहीं बल्कि गुणवत्ता के स्तर पर भी दिखाई दें। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण और सार्वजनिक निगरानी व्यवस्था परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकती है।
जनता को रिपोर्ट का इंतजार
स्थानीय स्तर पर उठे सवालों के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर है। यदि जांच कराई जाती है तो उसकी रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। फिलहाल सड़क निर्माण परियोजना को लेकर चर्चा तेज है और नागरिक पारदर्शी जवाब की अपेक्षा कर रहे हैं।
मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में चल रहे 55 लाख रुपये की लागत वाले सड़क निर्माण कार्य पर गुणवत्ता संबंधी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने तकनीकी जांच और रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। दूसरी ओर किसी भी अनियमितता की पुष्टि अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस विवाद की वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है और जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब दे सकती है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें