बिजली बिल में 10% ईंधन अधिभार का विरोध: मेरठ में व्यापारियों का प्रदर्शन, निर्णय वापस लेने की मांग

मेरठ में बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार जोड़ने के प्रस्ताव के विरोध में व्यापारियों ने ऊर्जा भवन पर प्रदर्शन किया। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में हुए विरोध कार्यक्रम में व्यापारियों ने विद्युत नियामक आयोग के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्णय वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि इससे व्यापार, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा तथा महंगाई को भी बढ़ावा मिल सकता है।

ऊर्जा भवन में एमडी को ज्ञापन देते हुए व्यापारी नेता लोकेश अग्रवाल व अन्य। फोटोः यूपी आज लाइव

बिजली बिल में 10% ईंधन अधिभार का विरोध: मेरठ में व्यापारियों का प्रदर्शन, निर्णय वापस लेने की मांग

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था के खिलाफ मेरठ के व्यापारियों ने शुक्रवार को ऊर्जा भवन पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल हुए। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को सौंपा।

व्यापारियों का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं पर पहले से ही विभिन्न प्रकार के शुल्क लागू हैं। ऐसे में बिजली बिल में अतिरिक्त 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार जोड़ने का निर्णय उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और औद्योगिक इकाइयों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला साबित होगा। उनका आरोप है कि इस तरह के अधिभार को लागू करने से पहले व्यापक जनसुनवाई और सभी पक्षों से पर्याप्त विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

ऊर्जा भवन पर प्रदर्शन, निर्णय वापस लेने की मांग

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने कहा कि पश्चिमांचल क्षेत्र के व्यापार और उद्योग पहले से ही बढ़ती लागत, महंगाई और बाजार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में बिजली बिल में अतिरिक्त भार डालना व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित ईंधन अधिभार को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर बढ़ने वाला यह अतिरिक्त खर्च अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि के रूप में आम जनता तक पहुंचेगा। इससे बाजार में महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ सकता है।

बिजली दर निर्धारण प्रक्रिया पर उठाए सवाल

व्यापारियों ने अपने ज्ञापन में कहा कि विद्युत नियामक आयोग प्रत्येक वर्ष बिजली उत्पादन लागत, वितरण व्यय और अन्य वित्तीय पहलुओं की समीक्षा के बाद बिजली दरों का निर्धारण करता है। ऐसे में वर्ष के बीच में अलग से ईंधन अधिभार जोड़ना उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त बोझ पैदा करने वाला कदम माना जा रहा है।

उनका तर्क है कि यदि उत्पादन लागत में वृद्धि होती है तो उसका मूल्यांकन वार्षिक दर निर्धारण प्रक्रिया में किया जाना चाहिए। बीच सत्र में अधिभार लगाने से पारदर्शिता और पूर्वानुमान की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योगों पर पड़ सकता है असर

मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और अन्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में हजारों लघु एवं मध्यम उद्योग संचालित हैं। इन उद्योगों की उत्पादन लागत में बिजली एक महत्वपूर्ण घटक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली खर्च बढ़ता है तो विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

दिल्ली-एनसीआर से सटे क्षेत्रों में पहले से ही श्रम, परिवहन और कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। ऐसे में बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लागू होने पर छोटे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अपने परिचालन खर्च का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है।

व्यापारियों ने महंगाई बढ़ने की आशंका जताई

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिजली दरों में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वृद्धि का सीधा प्रभाव बाजार कीमतों पर पड़ता है। उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और खुदरा व्यापार सभी बिजली पर निर्भर हैं। इसलिए ईंधन अधिभार लागू होने से वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंततः आम उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा।

व्यापारिक संगठनों ने सरकार और नियामक आयोग से आग्रह किया कि उपभोक्ता हितों, औद्योगिक विकास और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए।

कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखा जाएगा। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी और ज्ञापन के माध्यम से अपना पक्ष प्रशासन तक पहुंचाया।

मेरठ में बिजली बिल में 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार के विरोध ने यह संकेत दिया है कि व्यापारिक समुदाय बिजली शुल्क में किसी भी अतिरिक्त वृद्धि को लेकर गंभीर चिंताएं रखता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के व्यापार एवं उद्योग क्षेत्र पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण बन सकता है। अब सभी की निगाहें विद्युत नियामक आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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