यूपी बिजली विभाग संकट: ऊर्जा मंत्री के आरोपों के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ की बड़ी समीक्षा बैठक, बिजली दरों पर हो सकता है बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में आंतरिक कलह और गंभीर आरोपों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग की एक आपात उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है। ऊर्जा मंत्री द्वारा विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों पर लगाए गए सनसनीखेज आरोपों के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। आगामी 15 जून को होने वाली इस बैठक में राज्य में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, तकनीकी खामियों को दूर करने और नई बिजली दरों को लेकर अंतिम निर्णय लिए जाने की प्रबल संभावना है।

योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश

यूपी बिजली विभाग संकट: ऊर्जा मंत्री के आरोपों के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ की बड़ी समीक्षा बैठक, बिजली दरों पर हो सकता है बड़ा फैसला

लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में आंतरिक गतिरोध और गंभीर प्रशासनिक आरोपों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगामी 15 जून को विभाग की एक आपात और अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई है। लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की चरमराती विद्युत व्यवस्था, ऊर्जा मंत्री के तीखे आरोपों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बिजली दरों के बोझ को लेकर निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। इस प्रशासनिक कदम से प्रदेश की सियासत और ऊर्जा महकमे में भारी हलचल पैदा हो गई है।

ऊर्जा मंत्री के सनसनीखेज आरोप और प्रशासनिक गतिरोध

उत्तर प्रदेश का बिजली विभाग इस समय इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है, जिसने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में ऊर्जा मंत्री द्वारा अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंधन पर सीधे तौर पर असहयोग और लापरवाही के सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। मंत्री का आरोप है कि अधिकारी उनकी प्राथमिकताओं को दरकिनार कर मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। इस खुले टकराव के बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए विभाग के तमाम शीर्ष अधिकारियों, डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों और ऊर्जा मंत्री को आमने-सामने बिठाकर जवाबदेही तय करने का मन बना लिया है।

भीषण गर्मी में बिजली कटौती और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का संदर्भ

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पूरा प्रदेश, विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, और नोएडा सहित पूरा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ बिजली मांग से जूझ रहा है। इस वर्ष राज्य में बिजली की मांग इतिहास के सर्वोच्च स्तर 30,339 मेगावाट को पार कर गई है। ट्रांसफार्मर फुंकने, स्थानीय स्तर पर ट्रिपिंग और अघोषित कटौती के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता का आक्रोश चरम पर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की इस आंख-मिचौली से उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा है। मुख्यमंत्री इस बैठक में पश्चिमी यूपी और एनसीआर क्षेत्र की विशेष भौगोलिक और औद्योगिक स्थिति को देखते हुए फीडर-वाइज जवाबदेही तय कर सकते हैं, जिससे स्थानीय जनता को तुरंत राहत मिल सके।

बिजली दरों में बदलाव और उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

इस महा-समीक्षा बैठक का एक सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण एजेंडा उत्तर प्रदेश में बिजली दरों की नई समीक्षा करना है। राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों पर बिजली दरों में कोई नया इजाफा न किया जाए। इसके विपरीत, बिजली विभाग घाटे और बुनियादी ढांचे की मरम्मत का हवाला देकर वित्तीय प्रबंधन सुधारने की दलील दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री चुनावी वर्ष के करीब आते राजनीतिक परिदृश्य और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को बिजली दरों को नियंत्रित रखने या कुछ श्रेणियों में राहत देने का कड़ा निर्देश दे सकते हैं।

बुनियादी ढांचे में सुधार और स्मार्ट मीटर की चुनौतियां

बैठक में केवल प्रशासनिक कलह ही नहीं, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भी व्यापक मंथन होना तय है। उत्तर प्रदेश में लगभग 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन जून 2026 से प्रीपेड उपभोक्ताओं को दोबारा पोस्टपेड व्यवस्था में स्थानांतरित किए जाने की प्रक्रिया ने तकनीकी जटिलताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता में हालांकि वर्ष 2022 की तुलना में 86 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है और कुल स्थापित क्षमता 13,388 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, परंतु पारेषण और वितरण प्रणाली (ट्रांसमिशन नेटवर्क) की कमजोरी के कारण बिजली घर-घर तक निर्बाध रूप से नहीं पहुंच पा रही है। मुख्यमंत्री इस बैठक में जर्जर तारों को बदलने और नए सब-स्टेशनों के निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट भी तलब करेंगे।

शासन और व्यवस्था के लिए लिटमस टेस्ट

अंततः, बिजली विभाग की यह प्रस्तावित बैठक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' और सुशासन के सिद्धांत की एक कड़ी परीक्षा साबित होने वाली है। ऊर्जा मंत्री के आरोपों ने जो विभागीय दरारें उजागर की हैं, उन्हें पाटना और जनता को बिना किसी कटौती के सस्ती बिजली मुहैया कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि इस बैठक के बाद भी धरातल पर सुधार नहीं दिखता, तो न केवल अधिकारियों पर गाज गिरना तय है, बल्कि इसका सीधा असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ेगा। उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से यह बैठक उनके मासिक बजट को तय करने वाली साबित होगी।

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