बिजली की दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल

उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) ने राज्य सरकार द्वारा बिजली की दरों में दस प्रतिशत ईंधन अधिभार बढ़ाए जाने के विरोध में प्रदेश व्यापी आंदोलन की घोषणा की है। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि बढ़ी हुई दरें, स्मार्ट मीटर के अत्यधिक दाम और वाणिज्यिक कनेक्शनों पर न्यूनतम शुल्क तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो व्यापारी समाज शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और पुतला दहन करने के लिए विवश होगा।

लोकेश अग्रवाल, व्यापारी नेता

बिजली की दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल

मेरठ, यूपी आज लाइव डेस्क। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में दस प्रतिशत ईंधन अधिभार लगाने के निर्णय के विरोध में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) ने एक बड़े प्रदेश व्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे व्यापारियों और आम जनता पर बिजली बिलों का यह नया बोझ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इसके विरोध में पूरे राज्य में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रदर्शन किए जाएंगे।

व्यापार जगत और कुटीर उद्योगों पर संकट के बादल

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों के बीच बिजली नियामक आयोग और सरकार के इस नए फैसले ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। व्यापार मंडल के आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में इस वृद्धि के कारण बाजार में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं लगभग पच्चीस से तीस प्रतिशत तक महंगी हो जाएंगी। इस अतिरिक्त वित्तीय भार का सबसे घातक प्रभाव उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के अंतर्गत आने वाले गाजियाबाद, हापुड़, और मेरठ जैसे औद्योगिक जिलों के कुटीर, घरेलू, छोटे तथा मध्यम वर्गीय उद्योगों पर पड़ेगा, जिनके बंद होने का वास्तविक खतरा पैदा हो गया है।

स्मार्ट मीटर खरीद में भारी धांधली के संगीन आरोप

संगठन ने नए कनेक्शन लेते समय लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की कीमतों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका व्यक्त की है। प्रांतीय नेतृत्व का कहना है कि पूर्व में दो किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए मीटर की कीमत मात्र छह सौ पचहत्तर रुपये निर्धारित थी, जिसे अब स्मार्ट मीटर के नाम पर बढ़ाकर तीन हजार आठ सौ पचास रुपये कर दिया गया है। व्यापार मंडल ने इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि को मीटर खरीद में हुई भारी धांधली का संकेत बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त धनराशि को तुरंत वापस करने की मांग की है।

वाणिज्यिक कनेक्शनों और अघोषित कटौती पर चौतरफा घेराबंदी

व्यापारियों की नाराजगी केवल दरों को लेकर नहीं है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और जटिल नियमों को लेकर भी है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष प्रमुखता से मांग रखी है कि वाणिज्यिक श्रेणी यानी एलएमवी-दो के तहत आने वाले व्यावसायिक कनेक्शनों पर थोपा गया मिनिमम चार्ज (न्यूनतम शुल्क) तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। इसके साथ ही, भीषण गर्मी के इस मौसम में राज्य भर में हो रही अघोषित बिजली कटौती पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि बिजली कटौती के कारण विनिर्माण इकाइयां ठप पड़ी हैं और व्यापारियों को महंगे जनरेटरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

लोकतांत्रिक और चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

संगठन ने सरकार को अपनी नीतियां सुधारने के लिए कड़ा अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि जनविरोधी फैसले वापस नहीं हुए तो व्यापारी समाज सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगा। इस आंदोलन को पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक सीमाओं के भीतर संचालित किया जाएगा। आगामी दिनों में जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना, बढ़ती महंगाई के प्रतीकात्मक पुतले फूंकना और आवश्यकता पड़ने पर क्रमिक भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे ताकि सरकार को जनहित में निर्णय बदलने पर विवश किया जा सके।

बिजली की बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट मीटर के दामों को लेकर उपजा यह असंतोष केवल व्यापारिक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम उपभोक्ता की जेब से भी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहां उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहां बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता का लगातार महंगा होना आर्थिक प्रगति को बाधित कर सकता है। सरकार को चाहिए कि वह व्यापार मंडल की इन जायज मांगों और स्मार्ट मीटर खरीद प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर संवेदनशीलता से विचार करे, ताकि उद्योगों को संकट से बचाते हुए आम नागरिकों को राहत दी जा सके।

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