केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान: सिर्फ सरकार और भगवान के भरोसे रहने से नहीं बदलेगा देश

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित 'जल संवाद' सम्मेलन के दौरान समाज को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल शासन और ईश्वरीय भरोसे बैठे रहने से देश की तस्वीर नहीं बदली जा सकती, बल्कि विकास के लिए जनभागीदारी को एक जनांदोलन बनाना होगा। गडकरी ने विदर्भ क्षेत्र में जल संरक्षण और किसानों की दशा सुधारने के लिए सामाजिक संस्थाओं के जमीनी प्रयासों की सराहना करते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान: सिर्फ सरकार और भगवान के भरोसे रहने से नहीं बदलेगा देश

नागपुर, एजेंसी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश के सर्वांगीण विकास के लिए समाज की आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयासों को अनिवार्य बताया है। नागपुर में आयोजित 'जल संवाद' सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रत्येक नागरिक विकास के कार्यों में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने व्यवस्था की कमियों और सामाजिक मानसिकता पर कटाक्ष करते हुए लोगों से सरकारी तंत्र पर अत्यधिक निर्भरता छोड़ने का आह्वान किया।

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केवल सरकार और भगवान के भरोसे बदलाव असंभव

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कार्यक्रम के दौरान समाज की एक बड़ी कमजोरी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लोग हर छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए या तो पूरी तरह सरकार पर आश्रित हो जाते हैं या फिर सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़ देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि केवल इन दोनों के भरोसे ही सब कुछ ठीक होना होता, तो देश की स्थिति बहुत पहले ही बदल चुकी होती। देश को महाशक्ति बनाने और बुनियादी स्तर पर बदलाव लाने के लिए हमें समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक करना होगा और जनभागीदारी को शासन की प्राथमिक शक्ति बनाना होगा।

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विदर्भ में जल संरक्षण और सामाजिक संस्थाओं के प्रयास

यह सम्मेलन 'पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था' के गौरवशाली 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर के पर्यावरणविदों और जल संचयन विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। नितिन गडकरी ने विदर्भ जैसे कृषि प्रधान और सूखा प्रभावित क्षेत्र में इस संस्था द्वारा किए गए कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने बताया कि संस्था ने बिना सरकारी सहायता की प्रतीक्षा किए स्थानीय स्तर पर कुओं को पुनर्जीवित किया और पारंपरिक जल स्रोतों को सुधारा, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

किसानों की आत्मनिर्भरता और सौर ऊर्जा का विकल्प

जल संरक्षण के इन अभिनव प्रयासों का सीधा प्रभाव विदर्भ के किसानों के जीवन पर दिखाई दे रहा है। खेतों तक पानी पहुँचने और सिंचाई की आधुनिक प्रणालियों के विकसित होने से क्षेत्र में फसलों की उत्पादकता बढ़ी है। इसके साथ ही किसानों ने बिजली के पारंपरिक संकट से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर सोलर पंप अपनाए हैं। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि इन आत्मनिर्भर प्रयासों के कारण विदर्भ के किसान अब कर्ज के जाल से बाहर निकल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में होने वाली किसानों की आत्महत्या जैसी अत्यंत दुखद घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गई है।

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पर्यावरण रक्षा के लिए नई तकनीकों का समावेश

सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नितिन गडकरी ने नीतिगत बदलावों और आधुनिक अनुसंधान पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संचयन और पर्यावरण की रक्षा के लिए हमें केवल पुरानी पद्धतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर परखे गए वैज्ञानिक मॉडलों को भी अपनाना होगा। उन्होंने सामाजिक संगठनों और युवाओं से अपील की कि वे जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए स्टार्ट-अप और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दें, ताकि पानी की हर एक बूंद का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

नितिन गडकरी का यह वक्तव्य भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक कर्तव्यों की याद दिलाता है। नीतिगत स्तर पर सरकारें ढांचागत सुधार और मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं, परंतु किसी भी राष्ट्र का वास्तविक और स्थायी उत्थान तभी संभव है जब जनभागीदारी उसकी रीढ़ बने। विदर्भ में जल संरक्षण के सफल प्रयोगों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब समाज स्वयं दायित्व उठाता है, तो न केवल आर्थिक समृद्धि आती है बल्कि पर्यावरण का भी स्थायी संरक्षण होता है। भविष्य के भारत के निर्माण के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा।

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