प्राथमिक विद्यालय भराला में मातृ दिवस पर बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, पोस्टर प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
दौराला क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय भराला में मातृ दिवस के अवसर पर पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने माँ के प्रेम, संस्कार और स्वच्छता जैसे विषयों पर आकर्षक चित्र बनाकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम का संचालन इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि कौशिक के निर्देशन में हुआ। विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। विद्यालय की इस पहल को अभिभावकों और शिक्षकों ने सराहनीय बताया।
प्राथमिक विद्यालय भराला में मातृ दिवस पर बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, पोस्टर प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। जनपद मेरठ के दौराला विकासखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय भराला में शुक्रवार को मातृ दिवस उत्साह और भावनात्मक वातावरण के बीच मनाया गया। विद्यालय परिसर बच्चों की रंगीन कल्पनाओं और मातृत्व के प्रति सम्मान से सराबोर दिखाई दिया। कार्यक्रम के अंतर्गत पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें कक्षा एक से पांच तक के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजन इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि कौशिक के निर्देशन में संपन्न हुआ।
प्रतियोगिता में भाग लेते बच्चे। फोटोः यूपी आज लाइव।
विद्यालय में कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों को माँ के महत्व, उनके त्याग और समाज निर्माण में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों ने “माँ का प्यार”, “माँ हमारी पहली गुरु” तथा “स्वच्छ भारत में माँ की भूमिका” जैसे विषयों पर आकर्षक पोस्टर तैयार किए। कई विद्यार्थियों ने अपने चित्रों के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि परिवार और समाज में संस्कारों की पहली पाठशाला माँ ही होती हैं।
मातृ दिवस पर बच्चों ने चित्रों से व्यक्त की भावनाएं
प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। छोटे-छोटे बच्चों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से अपनी भावनाओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। किसी ने माँ को त्याग और ममता की प्रतिमूर्ति बताया तो किसी ने स्वच्छता और अनुशासन में माँ की भूमिका को चित्रित किया। शिक्षकों ने बच्चों की कल्पनाशक्ति और प्रस्तुति की सराहना की।
इंचार्ज प्रधानाध्यापिका शशि कौशिक ने कहा कि माँ बच्चों की पहली शिक्षिका होती हैं और जीवन के मूल संस्कार घर से ही प्रारंभ होते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों के भीतर नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और रचनात्मकता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम भी आवश्यक हैं।
मेरठ के विद्यालयों में बढ़ रही रचनात्मक गतिविधियां
पश्चिमी उत्तर प्रदेश विशेषकर मेरठ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के विद्यालयों में पिछले कुछ वर्षों से बच्चों की रचनात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के आयोजन लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टर प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विषय आधारित गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में इस तरह के आयोजन शिक्षा के वातावरण को और अधिक सकारात्मक बना रहे हैं।
विजेता विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय की ओर से प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रोत्साहन प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में संस्कार और रचनात्मक सोच दोनों विकसित होते हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में शिक्षिका ममता, शालिनी शर्मा, कविता बालियान और रेशमा देवी का विशेष सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
मातृ सम्मान के साथ शिक्षा में संस्कारों का संदेश
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में विद्यालयों में केवल शैक्षणिक शिक्षा ही नहीं बल्कि भावनात्मक और नैतिक शिक्षा भी अत्यंत आवश्यक हो गई है। मातृ दिवस जैसे आयोजन बच्चों को परिवार, समाज और संस्कारों के महत्व से जोड़ते हैं। प्राथमिक विद्यालय भराला का यह आयोजन इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है, जिसने बच्चों में रचनात्मक अभिव्यक्ति और माँ के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत किया।
प्राथमिक विद्यालय भराला में आयोजित मातृ दिवस कार्यक्रम ने यह साबित किया कि छोटे स्तर पर किए गए सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजन भी बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। विद्यालय की इस पहल ने शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक मूल्यों को जोड़ने का प्रेरणादायक संदेश दिया है।


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