खाद्य सुरक्षा कानून में व्यापारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, मेरठ में व्यापार संगठन ने उठाई आवाज
मेरठ में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम से जुड़ी व्यापारियों की समस्याओं और जांच प्रक्रिया में सुधार की मांग उठाई गई। व्यापारियों ने जांच रिपोर्ट समय पर देने, निजी प्रयोगशालाओं की कार्रवाई पर रोक और छोटे व्यापारियों को राहत देने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखा।
अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए व्यापार मंडल के कार्यकर्ता। फोटोः यूपी आज लाइव
खाद्य सुरक्षा कानून में व्यापारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा गया ज्ञापन, मेरठ में व्यापार संगठन ने उठाई आवाज
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम से जुड़ी व्यापारियों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा। यह ज्ञापन प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में सहायक आयुक्त ग्रेड दो खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मेरठ के माध्यम से प्रेषित किया गया। व्यापारियों ने जांच प्रक्रिया, नमूना परीक्षण, कार्रवाई और खाद्य सुरक्षा नियमों में व्यावहारिक सुधार की मांग उठाई है।
व्यापार प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार छोटे व्यापारियों और निर्माताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत सुझाव देते हुए सरकार से नियमों में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक क्षेत्रों में इस ज्ञापन को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा कानून में सुधार की मांग को लेकर व्यापारियों की पहल
उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अंतर्गत जब भी किसी उत्पाद का नमूना लिया जाता है तो खुदरा विक्रेता के साथ-साथ निर्माता को भी पक्षकार बनाया जाता है, लेकिन निर्माता को समय पर संबंधित प्रपत्र नहीं भेजे जाते। व्यापारियों ने मांग की है कि नमूना भरते समय यदि निर्माता को पक्षकार बनाया जाए तो संबंधित प्रपत्र उसके पते पर तत्काल पंजीकृत डाक से भेजा जाए।
ज्ञापन में नकली और डुप्लीकेट सामान की बढ़ती घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। व्यापारियों का कहना है कि कई बार खुदरा विक्रेता अथवा थोक व्यापारी द्वारा प्रस्तुत बिल के आधार पर निर्माता को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जांच रिपोर्ट में देरी और कार्रवाई प्रक्रिया पर उठे सवाल
व्यापार संगठन ने ज्ञापन में यह भी कहा कि खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट कई बार महीनों बाद प्राप्त होती है, जबकि अधिनियम में चौदह दिन के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। व्यापारियों ने मांग की कि उत्तर प्रदेश की सभी राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशालाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए जाएं।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में जांच रिपोर्ट में विलंब होने के कारण उत्पाद की उपयोग अवधि समाप्त हो जाती है और पुनः जांच का अधिकार भी प्रभावित होता है। ज्ञापन में मांग की गई कि यदि किसी नमूने को असुरक्षित घोषित किया जाता है तो केंद्रीय प्रयोगशाला से पुष्टि होने तक उत्पाद नष्ट करने या जब्त करने जैसी कठोर कार्रवाई न की जाए।
छोटे व्यापारियों और निर्माताओं के हितों की सुरक्षा की मांग
ज्ञापन में यह मुद्दा भी उठाया गया कि यदि किसी नमूने में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व नहीं पाए जाते और केवल मानकों में कमी होती है, तो उसे सीधे असुरक्षित घोषित न किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कमियों के आधार पर बड़ी कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा उनहत्तर के अंतर्गत मामूली मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए समझौता व्यवस्था लागू करने की मांग भी की। व्यापारियों का मानना है कि इससे छोटे मामलों का त्वरित समाधान होगा और न्यायालयों तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर अनावश्यक भार कम होगा।
मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारियों में बढ़ रही चिंता
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाद्य व्यापार तेजी से बढ़ रहा है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में हजारों छोटे व्यापारी खाद्य उत्पादों के कारोबार से जुड़े हुए हैं। व्यापार संगठनों का कहना है कि यदि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाई जाए तो इससे व्यापारिक वातावरण बेहतर होगा और उपभोक्ताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि निजी प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट के आधार पर सीधे कार्रवाई की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। व्यापारियों ने खाद्य मानकों के नए सिरे से निर्धारण तथा सरकार द्वारा लिए गए सभी नमूनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई।
इन व्यापारियों और पदाधिकारियों की रही मौजूदगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के साथ राजकुमार त्यागी, इसरार सिद्दीकी, मनी बंसल, मेहुल, रियाज, अतुल त्यागी, आकाश, सुशील जैन, चांद, राजा, मौ0 आसिफ, सरफराज, नरेश कुमार, सुनील कुमार, साजिद, अतुल्य गुप्ता, राम अवतार बंसल, संजय सागर, वसीम, गौरव गोयल, राजू, आफताब, वासिम सहित अनेक व्यापारी और संगठन पदाधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञापन पर कई व्यापारियों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति भी दर्ज कराई।
मेरठ में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री को भेजा गया यह ज्ञापन केवल व्यापारिक समस्याओं का दस्तावेज नहीं बल्कि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग भी है। व्यापारियों का कहना है कि उपभोक्ता सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करती है तो इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों छोटे व्यापारियों को राहत मिल सकती है और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बन सकती है।

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