मेरठ की अशोका फ्लोर मिल में भीषण आग: मची अफरा-तफरी, लाखों का नुकसान, दमकल की गाड़ियों ने पाया काबू

मेरठ के मुख्य औद्योगिक क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध अशोका फ्लोर मिल में अचानक भड़की भीषण आग के कारण पूरे परिसर में भारी अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद लपटों पर पूरी तरह नियंत्रण पाया। इस भयावह हादसे में मिल के भीतर रखी भारी मात्रा में कच्ची सामग्री और कीमती मशीनें जलकर स्वाहा हो गईं, जिससे मिल प्रबंधन को लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।

मेरठ की अशोका फ्लोर मिल में भीषण आग: मची अफरा-तफरी, लाखों का नुकसान, दमकल की गाड़ियों ने पाया काबू

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ के परतापुर औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रसिद्ध अशोका फ्लोर मिल में गुरुवार सुबह अचानक भीषण आग लगने से पूरे इलाके में हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। मिल परिसर से उठतीं गगनचुंबी लपटों और धुएं के गुबार को देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत दमकल विभाग और पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सका।

शॉर्ट सर्किट से भड़की चिंगारी ने लिया विकराल रूप

औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इस बड़ी फ्लोर मिल में सुबह की पाली का काम सामान्य रूप से चल रहा था, तभी मुख्य विद्युत पैनल के पास अचानक शॉर्ट सर्किट होने से तेज चिंगारी उठी। मिल के भीतर मौजूद अत्यधिक ज्वलनशील बारीक आटे और चोकर के कणों के कारण हवा में मौजूद धूल ने ईंधन का काम किया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। मिल के भीतर मौजूद सुरक्षा प्रणालियां और अग्निशमन यंत्र इस भीषण लपटों के सामने नाकाफी साबित हुए, जिसके कारण श्रमिकों को अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बाहर की तरफ भागना पड़ा।

दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई और कड़ी मशक्कत

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य अग्निशमन अधिकारी के नेतृत्व में दमकल विभाग की सात गाड़ियां एक के बाद एक मौके पर पहुंचीं। फैक्ट्री के चारों ओर संकरी गलियां और सुलगते हुए मलबे के कारण दमकलकर्मियों को शुरुआती दौर में परिसर के भीतर प्रवेश करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पानी की निरंतर बौछार करने के साथ-साथ अग्निशमन दल ने रासायनिक फोम का भी उपयोग किया ताकि अनाज और आटे की परतों के नीचे सुलग रही आग को पूरी तरह से शांत किया जा सके। लगभग चार घंटे के सघन और साहसिक अभियान के बाद टीम ने आग को पड़ोसी फैक्ट्रियों में फैलने से रोकते हुए उस पर पूरी तरह काबू पा लिया।

औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी और एनसीआर का परिप्रेक्ष्य

पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह के अग्नि हादसे लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मिल के भीतर स्थापित किए गए बिजली के तार काफी पुराने थे और बढ़ते लोड को सहने में सक्षम नहीं थे। दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद और नोएडा जैसे औद्योगिक हब की तर्ज पर मेरठ के कारखानों में भी समय-समय पर विद्युत सुरक्षा ऑडिट न होना एक बड़ी लापरवाही के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिल परिसर में वेंटिलेशन और डस्ट कलेक्शन सिस्टम आधुनिक मानकों के अनुरूप होता, तो हवा में आटे के कणों के कारण आग इतनी तेजी से नहीं फैलती।

लाखों के माल और मशीनरी के नुकसान का प्रारंभिक आकलन

इस भयावह अग्निकांड में किसी भी मानवीय क्षति या श्रमिक के हताहत होने की खबर नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है, परंतु मिल को भारी आर्थिक आघात लगा है। मिल प्रबंधन के अनुसार गोदाम में रखी सैकड़ों टन गेहूं की बोरियां, तैयार आटा और पैकेजिंग सामग्री पूरी तरह जलकर राख हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, प्रसंस्करण और पिसाई के लिए उपयोग में आने वाली आधुनिक ऑटोमैटिक मशीनें भी अत्यधिक तापमान के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे मिल में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है और नुकसान का आंकड़ा लाखों में आंका जा रहा है।

अशोका फ्लोर मिल में घटित यह गंभीर हादसा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे सुरक्षा मानकों को केवल कागजों तक सीमित न रखें। मेरठ और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को अब और अधिक सख्त रवैया अपनाना होगा। कारखानों में नियमित अग्नि सुरक्षा ड्रिल, विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता की समय-समय पर जांच करके ही भविष्य में इस प्रकार की विनाशकारी घटनाओं और भारी आर्थिक नुकसान को रोका जा सकता है।

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