लखनऊ में विद्युत विभाग ने रिमोट नियंत्रित उपकरणों से बिजली चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी मीटर की रीडिंग कम दिखाकर लंबे समय से बिजली चोरी कर रहे थे। मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस घटना के बाद स्मार्ट मीटर व्यवस्था और तकनीकी सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों में भी अब संदिग्ध बिजली कनेक्शनों की जांच तेज किए जाने की संभावना है।
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रिमोट से बिजली चोरी का बड़ा खुलासा, स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ करने वाला गिरोह पकड़ा गया
लखनऊ, एजेंसी। राजधानी लखनऊ में बिजली चोरी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रिमोट नियंत्रित उपकरणों की मदद से मीटर की गति धीमी कर बिजली चोरी की जा रही थी। विद्युत विभाग और सतर्कता दल की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जो आधुनिक तकनीक का उपयोग कर लंबे समय से बिजली विभाग को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहा था। मामले में कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रिमोट प्रणाली के जरिए मीटर रीडिंग को प्रभावित करते थे। इससे वास्तविक खपत कम दिखाई देती थी और उपभोक्ता कम बिल का भुगतान करते थे। इस खुलासे के बाद प्रदेश में स्मार्ट मीटर और बिजली निगरानी प्रणाली की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।
तकनीकी तरीके से हो रही थी बिजली चोरी
विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार गिरोह पारंपरिक तरीके से कटिया डालकर चोरी करने के बजाय अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग कर रहा था। जांच टीम को ऐसे उपकरण मिले हैं जिन्हें मीटर के पास लगाकर रिमोट से नियंत्रित किया जाता था। आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता मीटर की रफ्तार सामान्य दिखा देते थे ताकि जांच के दौरान संदेह न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की बिजली चोरी सामान्य जांच में पकड़ना आसान नहीं होता। यही कारण है कि कई महीनों तक विभाग को इसकी भनक नहीं लग सकी। अधिकारियों को संदेह है कि इस नेटवर्क में तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं।
लखनऊ में सामने आए इस मामले के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़ और सहारनपुर जैसे शहरों में तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण बिजली खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विद्युत विभाग अब संदिग्ध मीटरों और असामान्य बिलिंग वाले उपभोक्ताओं की जांच तेज करने की तैयारी में है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीकी माध्यमों से बिजली चोरी का यह तरीका दूसरे जिलों तक पहुंच चुका है तो इससे विद्युत वितरण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसका सीधा असर ईमानदार उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है, क्योंकि राजस्व घाटा बढ़ने पर व्यवस्था का भार आम उपभोक्ताओं पर आता है।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था की सुरक्षा पर उठे सवाल
प्रदेश में तेजी से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को बिजली व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था। लेकिन रिमोट आधारित बिजली चोरी के इस मामले ने यह संकेत दिया है कि तकनीकी सुरक्षा में अभी भी कई कमजोरियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मीटर बदल देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निगरानी प्रणाली, डेटा विश्लेषण और वास्तविक समय जांच को भी मजबूत करना होगा।
बिजली विभाग अब ऐसे उपभोक्ताओं की सूची तैयार कर रहा है जिनके बिल और वास्तविक खपत में असामान्य अंतर पाया गया है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कई अन्य जिलों में भी विशेष अभियान चलाया जा सकता है।
आम उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिजली चोरी केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग का मामला भी है। इससे ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार बढ़ता है और कई बार स्थानीय क्षेत्रों में बार-बार बिजली बाधित होने की समस्या भी पैदा होती है। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के शहरी इलाकों में गर्मियों के दौरान बढ़ती बिजली मांग के बीच इस प्रकार की चोरी पूरी व्यवस्था पर दबाव बढ़ाती है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं संदिग्ध मीटर या अवैध उपकरण दिखाई दें तो तत्काल विभाग को सूचना दें। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी में पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई दोनों हो सकती हैं।
लखनऊ में रिमोट नियंत्रित बिजली चोरी गिरोह का खुलासा यह दर्शाता है कि अपराधी अब पारंपरिक तरीकों के बजाय तकनीकी साधनों का उपयोग कर रहे हैं। यह मामला केवल बिजली चोरी तक सीमित नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी निगरानी की बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में प्रदेशभर में निगरानी और जांच अभियान तेज होने की संभावना है, जिससे ऐसे नेटवर्क पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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