अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की चेतावनी से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, MCX क्रूड रिकॉर्ड हाई पर


अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की चेतावनी से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, MCX क्रूड रिकॉर्ड हाई पर

नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई मंगलवार की सख्त समयसीमा (डेडलाइन) और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई है। भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर भी क्रूड की कीमतों ने 10,888 रुपये प्रति बैरल का ऐतिहासिक स्तर छू लिया है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और वैश्विक आंकड़े

कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को जबरदस्त उथल-पुथल देखी गई, जिसके चलते कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्तर को पार कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत यानी करीब 4.15 डॉलर की बढ़त के साथ 116.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स भी 1.69 प्रतिशत की मजबूती के साथ 111.63 डॉलर के इंट्राडे उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है। गौरतलब है कि इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

भारतीय वायदा बाजार एमसीएक्स पर क्रूड ऑयल का नया रिकॉर्ड

वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार को कच्चे तेल के वायदा भाव में 300 रुपये की जोरदार बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 10,888 रुपये प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर जा पहुंचा। केवल अप्रैल डिलीवरी ही नहीं, बल्कि मई अनुबंध की कीमतों में भी 1.82 प्रतिशत का उछाल देखा गया और यह 9,485 रुपये प्रति बैरल के नए शिखर पर पहुंच गया। आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं और पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

राष्ट्रपति ट्रंप का आक्रामक रुख और ईरान को अंतिम चेतावनी

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस ताजा तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह आक्रामक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए मंगलवार रात तक का समय दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान इस समयसीमा का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान पर "कहर बरपा" देगा। ट्रंप ने यहाँ तक धमकी दी है कि समझौते के अभाव में ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, जैसे पुल और बिजली संयंत्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इस आक्रामक रुख ने युद्ध की आशंकाओं को बल दे दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व और आपूर्ति संकट

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व इसी बात से समझा जा सकता है कि दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष के कारण यह समुद्री मार्ग लगातार बाधित है, जिससे इस साल कच्चे तेल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। ईरान ने फिलहाल किसी भी संघर्षविराम योजना को मानने से इनकार कर दिया है, जिससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसका प्रभाव वैश्विक इक्विटी बाजारों और भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स व निफ्टी) पर भी गिरावट के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह शक्ति प्रदर्शन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। यदि समयसीमा समाप्त होने के बाद तनाव कम नहीं होता और सैन्य कार्रवाई की स्थिति बनती है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) के मोर्चे पर बड़ी चुनौती पेश करेगी। आने वाले 24 घंटे वैश्विक कूटनीति और बाजार की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।

टिप्पणियाँ