यूपी में ट्रैफिक जाम से मुक्ति का नया प्लान: स्कूलों की छुट्टी के समय में बदलाव और भारी जुर्माना
लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शहरों को जाम मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब बड़े स्कूलों और दफ्तरों की छुट्टी एक ही समय पर नहीं होगी। डीजीपी द्वारा जारी नई एसओपी के अनुसार, यातायात दबाव कम करने के लिए स्कूलों के समय में 15-15 मिनट का अंतराल रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
शहरों को जाम मुक्त बनाने के लिए सीआरटीसी योजना का आगाज
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में बढ़ते यातायात दबाव और घंटों लंबे जाम से आम जनता को निजात दिलाने के लिए पुलिस महानिदेशक ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। 'रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन स्कीम' (सीआरटीसी) के तहत प्रदेश के 20 बड़े शहरों के 172 मार्गों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें पूरी तरह जाम मुक्त बनाया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पीक आवर्स के दौरान सड़क पर वाहनों के बोझ को कम करना और यात्रा के समय को न्यूनतम स्तर पर लाना है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि वर्तमान में पीक ऑवर्स के दौरान यात्रा का समय सामान्य की तुलना में 10 से 15 गुना तक बढ़ जाता है, जिसे कम करना विभाग की प्राथमिकता है।
स्कूलों और दफ्तरों के समय में अंतराल की नई व्यवस्था
ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा कारण स्कूलों और कार्यालयों की एक ही समय पर होने वाली छुट्टी को माना गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, अब आसपास स्थित स्कूलों और दफ्तरों के छूटने के समय में कम से कम 15 मिनट का अंतर अनिवार्य रूप से रखा जाएगा। इससे एक ही समय पर सड़कों पर वाहनों का सैलाब नहीं उमड़ेगा और यातायात का प्रवाह सुचारू बना रहेगा। इसके साथ ही, व्यस्त चौराहों और तिराहों के 100 मीटर के दायरे को 'नो-टॉलरेंस जोन' घोषित किया गया है। इस निर्धारित क्षेत्र में किसी भी सवारी को उतारने या बैठाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, ताकि मुख्य मार्ग पर गति बनी रहे।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगेगा सख्त जुर्माना
नई गाइडलाइन में केवल व्यवस्था परिवर्तन ही नहीं, बल्कि दंडात्मक प्रावधानों को भी कड़ा किया गया है। नो-एंट्री जोन का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों पर 20 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, गलत दिशा में वाहन चलाने वालों से 2000 रुपये वसूले जाएंगे। अवैध पार्किंग की समस्या से निपटने के लिए पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये और दूसरी बार उल्लंघन करने पर 2000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है। सड़कों पर अतिक्रमण हटाने और ई-रिक्शा के लिए अलग जोन बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि मुख्य सड़कों पर छोटे वाहनों की वजह से लगने वाले जाम को रोका जा सके।
तकनीक और अतिरिक्त बल से होगी निगरानी
यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए केवल नियमों का सहारा नहीं लिया जा रहा, बल्कि धरातल पर रूट मार्शल की तैनाती भी की जा रही है। पीक ऑवर्स के दौरान अधिक दबाव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा जो सीधे तौर पर यातायात संचालन की निगरानी करेगा। सड़कों के चौड़ीकरण और मुख्य मार्गों को ई-रिक्शा मुक्त क्षेत्र घोषित करने जैसे कदम भविष्य में शहरी परिवहन को एक नई दिशा देंगे। अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है, जिससे लापरवाही की गुंजाइश कम होगी और व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी।

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