UP TGT LT Grade Recruitment 2026: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब TET अनिवार्य
इलाहाबाद, एजेंसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में टीजीटी और
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट
कर दिया है कि अब इन भर्तियों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना
अनिवार्य होगा। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा और
भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक सेवा नियमावली-1983 के तहत निर्धारित योग्यताओं के साथ अब टीईटी पास होना भी आवश्यक होगा। इससे पहले कई भर्तियों में इस योग्यता को लेकर स्पष्टता नहीं थी, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।
🔶 याचिका के बाद सामने आया मामला
यह पूरा मामला प्रयागराज निवासी जयहिंद यादव और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई याचिका के बाद सामने आया। याचिका में 28 जुलाई 2025 को जारी एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की पात्रता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस भर्ती में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 का उल्लंघन किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया कि लोक सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि भर्ती किस कक्षा के लिए की जा रही है और यह किस काडर के अंतर्गत आती है। इस प्रकार की अस्पष्टता से अभ्यर्थियों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
🔶 विज्ञापन में खामी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में भर्ती विज्ञापन की खामियों को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि विज्ञापन में कक्षाओं का स्पष्ट उल्लेख न करना एक बड़ी चूक है। इसके चलते अभ्यर्थियों को यह समझने में कठिनाई होती है कि वे किस स्तर के शिक्षण कार्य के लिए आवेदन कर रहे हैं।
कोर्ट ने लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि वह एक शुद्धि पत्र जारी करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि यह भर्ती केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अभ्यर्थियों को सही जानकारी मिल सकेगी।
🔶 आयोग के दावे पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत हलफनामे का भी संज्ञान लिया। इसमें बताया गया कि प्रदेश में 904 ऐसे विद्यालय हैं, जहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है। इस तथ्य के आधार पर कोर्ट ने आयोग के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 6 से 8 तक कोई रिक्त पद नहीं हैं।
कोर्ट ने इस दावे को तार्किक नहीं माना और कहा कि जब इतने विद्यालयों में पढ़ाई हो रही है, तो यह संभव नहीं है कि इन कक्षाओं में कोई पद खाली न हो। इससे यह स्पष्ट होता है कि भर्ती प्रक्रिया में कहीं न कहीं जानकारी को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।
🔶 CT कैडर के विलय का भी पड़ा असर
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि सर्टिफिकेट ऑफ टीचिंग (सीटी) कैडर को पहले ही समाप्त घोषित कर दिया गया है और इसे एलटी कैडर में मिला दिया गया है। ऐसे में टीईटी पास होना अनिवार्य होना चाहिए, क्योंकि अब सभी शिक्षक एक ही श्रेणी में आते हैं।
कोर्ट ने इस तर्क को भी उचित माना और कहा कि जब कैडर का विलय हो चुका है, तो सभी अभ्यर्थियों के लिए समान योग्यता लागू होना जरूरी है। इससे न केवल भर्ती प्रक्रिया में समानता आएगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
🔶 फैसले का अभ्यर्थियों पर प्रभाव
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। अब वे बिना टीईटी के टीजीटी या एलटी ग्रेड की भर्ती में आवेदन नहीं कर सकेंगे। इससे प्रतियोगिता का स्तर बढ़ेगा और केवल योग्य उम्मीदवार ही चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ पाएंगे।
इसके अलावा, जो अभ्यर्थी पहले से तैयारी कर रहे हैं, उन्हें अब अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा और टीईटी को प्राथमिकता देनी होगी। यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद संभावना है कि उत्तर प्रदेश में होने वाली सभी शिक्षक भर्तियों में टीईटी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। साथ ही, भर्ती विज्ञापनों में भी अधिक पारदर्शिता लाई जाएगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
सरकार और लोक सेवा आयोग को अब अपनी भर्ती प्रक्रिया में सुधार करना होगा और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। इससे न केवल अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। टीजीटी और एलटी ग्रेड भर्तियों में टीईटी को अनिवार्य बनाकर कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और योग्यता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
यह निर्णय जहां एक ओर योग्य अभ्यर्थियों के लिए अवसर बढ़ाएगा, वहीं दूसरी ओर भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा। आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

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