यूपी के लाखों शिक्षकों का दिल्ली कूच: टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 4 अप्रैल को रामलीला मैदान में महारैली

यूपी के लाखों शिक्षकों का दिल्ली कूच: टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 4 अप्रैल को रामलीला मैदान में महारैली

लखनऊ, एजेंसी। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में उत्तर प्रदेश समेत देशभर के शिक्षक लामबंद हो गए हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के आह्वान पर आगामी 4 अप्रैल को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल शक्ति प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। इस महारैली में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षकों का जत्था राष्ट्रीय राजधानी की ओर रवाना होना शुरू हो गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह लड़ाई उनके अस्तित्व और जीविका को बचाने की है।

पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी थोपना अन्यायपूर्ण

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रभावी होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों पर टीईटी की शर्त लागू करना पूरी तरह से तर्कहीन और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने तर्क दिया कि जब उत्तर प्रदेश में टीईटी की व्यवस्था 27 जुलाई 2011 से प्रभावी हुई है, तो उससे पहले सेवा में आए शिक्षकों को इस दायरे में लाना अनुचित है। इसी आक्रोश के चलते प्रदेश के एक लाख से अधिक प्राथमिक शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी आवाज बुलंद करने पहुंच रहे हैं।

कई जिलों से दिल्ली के लिए रवाना हुए शिक्षक

आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोरखपुर, कुशीनगर और उन्नाव जैसे जनपदों से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को ही दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया है। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपने निर्णय को पूर्व प्रभाव (Retrospective) से लागू करना लाखों शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इससे देश भर के उन शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है जो वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

केंद्र सरकार से हस्तक्षेप और कानून बनाने की मांग

शिक्षक संगठनों की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर हस्तक्षेप करे और पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत प्रदान करने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन करे। डॉ. शर्मा के अनुसार, 4 अप्रैल की इस रैली में लगभग एक दर्जन राज्यों के प्रतिनिधि और लाखों की संख्या में शिक्षक एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाएंगे। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।

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