उत्तर प्रदेश में जनगणना तैयारी तेज, 16 अप्रैल से ट्रेनिंग और 7 मई से पोर्टल शुरू

उत्तर प्रदेश में जनगणना तैयारी तेज, 16 अप्रैल से ट्रेनिंग और 7 मई से पोर्टल शुरू

लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारी तेज हो गई है और 2027 से पहले पहले चरण के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। 16 अप्रैल से प्रगणकों की ट्रेनिंग शुरू होगी और 7 मई से स्व-गणना पोर्टल आम जनता के लिए खोला जाएगा। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बनने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारी ने पकड़ी रफ्तार

उत्तर प्रदेश में जनगणना को लेकर उच्च स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मकान सूचीकरण और प्रारंभिक तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य की जनसंख्या और संसाधनों का सटीक आंकलन करना है, जिससे भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके।

बैठक में जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने भी प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन का फोकस इस बार शहरी झुग्गी बस्तियों और अधिक गतिशील आबादी वाले क्षेत्रों पर विशेष रूप से है, ताकि कोई भी व्यक्ति गणना से छूट न पाए।

16 अप्रैल से शुरू होगी ट्रेनिंग, 5.5 लाख कर्मियों की तैनाती

उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए करीब साढ़े पांच लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। इन सभी को 16 अप्रैल से 7 मई के बीच अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें डिजिटल उपकरणों के उपयोग, डेटा संग्रहण और सत्यापन की प्रक्रिया से परिचित कराया जाएगा।

प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रशिक्षण प्रक्रिया सुचारु और प्रभावी ढंग से पूरी हो सके। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि फील्ड में जाने से पहले हर कर्मचारी पूरी तरह तैयार हो।

7 मई से खुलेगा स्व-गणना पोर्टल

इस बार उत्तर प्रदेश में जनगणना के तहत नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा भी दी जा रही है। 7 मई से 21 मई 2026 तक पोर्टल सक्रिय रहेगा, जिसके माध्यम से लोग स्वयं अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

यह पहल न केवल प्रक्रिया को आसान बनाएगी बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ाएगी। इसके लिए राज्यभर में जन-जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। डेटा संग्रहण से लेकर सत्यापन और निगरानी तक की सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जाएंगी। इसके लिए तकनीकी सहायकों की भर्ती भी की जा रही है, जो जियो-टैगिंग और सीमांकन कार्य को मजबूत बनाएंगे।

पहले चरण में 22 मई से 20 जून 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या गणना पूरी की जाएगी।

जनगणना का प्रभाव और भविष्य की दिशा

उत्तर प्रदेश में जनगणना का सीधा प्रभाव सरकारी योजनाओं और नीतियों पर पड़ेगा। सटीक आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी। डिजिटल प्रणाली के कारण पारदर्शिता बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

आने वाले समय में यह डेटा राज्य के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और प्रशासनिक निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाएगा।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में जनगणना की तैयारियां तेज गति से चल रही हैं और इस बार इसे पूरी तरह डिजिटल रूप में आयोजित किया जा रहा है। ट्रेनिंग, स्व-गणना पोर्टल और तकनीकी सुधारों के जरिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह जनगणना राज्य के विकास और योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार साबित होगी।

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