सीतापुर अग्निकांड: जली किताबों के बीच पढ़ती सावित्री, अखिलेश यादव ने उठाया पढ़ाई का जिम्मा

सीतापुर अग्निकांड: जली किताबों के बीच पढ़ती सावित्री, अखिलेश यादव ने उठाया पढ़ाई का जिम्मा

सीतापुर, एजेंसी। सीतापुर के सदरपुर क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद एक भावुक तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें छोटी बच्ची सावित्री जली हुई किताबों के बीच बैठकर पढ़ाई करती नजर आई। इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसकी पूरी शिक्षा का जिम्मा उठाने की घोषणा की है।

अग्निकांड के बाद भी नहीं टूटा पढ़ाई का हौसला

सीतापुर अग्निकांड में कई परिवारों का सामान जलकर राख हो गया, जिसमें सावित्री का स्कूल बैग और किताबें भी शामिल थीं। इसके बावजूद अगली सुबह वह अधजली किताब लेकर अपना होमवर्क करती दिखी। यह दृश्य न केवल मार्मिक था बल्कि यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति उसका जुनून कम नहीं हुआ है।

सोशल मीडिया से पहुंची मदद

सावित्री की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद यह मामला अखिलेश यादव तक पहुंचा। उन्होंने बच्ची की लगन को देखते हुए उसकी आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों ने सराहा है।

डॉक्टर बनने का सपना देख रही है सावित्री

सावित्री गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 4 की छात्रा है और उसका सपना डॉक्टर बनने का है। उसने बताया कि वह रोज स्कूल जाती है और मन लगाकर पढ़ाई करती है। किताबें जलने के बाद भी उसका उत्साह कम नहीं हुआ और अब उसे नई किताबें भी मिल चुकी हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति और संघर्ष

सावित्री के पिता हरिश्चंद्र एक गरीब किसान हैं, जिनके पास सीमित जमीन है। वे मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि वे बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं करते और अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं। आग लगने के बाद परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि गांव और प्रशासन की मदद से भोजन और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।

घटना का प्रभाव और सामाजिक संदेश

सीतापुर अग्निकांड और सावित्री की कहानी ने समाज को एक बड़ा संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति समर्पण सफलता की राह दिखाता है। इस घटना ने न केवल प्रशासन को सतर्क किया है बल्कि समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत किया है।

निष्कर्ष

सावित्री की यह कहानी प्रेरणा देती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, यदि मन में कुछ करने की लगन हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं। अखिलेश यादव की पहल से उसकी शिक्षा का भविष्य सुरक्षित हुआ है और यह उदाहरण समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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