PM Mudra Yojana: स्वरोजगार को मिली नई उड़ान, 52 करोड़ से अधिक लोगों को मिला मुद्रा लोन; महिलाओं की रही बड़ी हिस्सेदारी
PM Mudra Yojana: स्वरोजगार को मिली नई उड़ान, 52 करोड़ से अधिक लोगों को मिला मुद्रा लोन; महिलाओं की रही बड़ी हिस्सेदारी
मेरठ, यूपी आज लाइव डेस्क। भारत में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अप्रैल 2015 में इस योजना की नींव रखे जाने के बाद से अब तक 52.37 करोड़ से अधिक ऋण (Loan) मंजूर किए जा चुके हैं। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से कुल 33.65 लाख करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई है, जिससे देश में स्वरोजगार के अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
महिला सशक्तिकरण और पिछड़ों को प्राथमिकता
पीएम मुद्रा योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। फैक्ट-शीट के मुताबिक, कुल आवंटित ऋणों में से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को प्रदान किए गए हैं। इसके साथ ही, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाले लाभार्थियों की संख्या भी कुल ऋणों का लगभग 50 प्रतिशत है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ऋण श्रेणियां: शिशु, किशोर और तरुण का गणित
मुद्रा योजना के तहत व्यापार की जरूरतों के हिसाब से तीन श्रेणियों में ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं:
शिशु लोन: इस श्रेणी में 50,000 रुपये तक के ऋण दिए जाते हैं। कुल ऋणों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी सबसे अधिक 78 प्रतिशत है, जबकि कुल आवंटित राशि में इनका योगदान 36 प्रतिशत है।
किशोर लोन: इसके तहत 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक का वित्तीय सहयोग मिलता है। संख्या के लिहाज से यह 20 प्रतिशत और राशि के हिसाब से 40 प्रतिशत की भागीदारी रखते हैं।
तरुण लोन: 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के ऋण इस श्रेणी में आते हैं। हालांकि संख्या में ये केवल 2 प्रतिशत हैं, लेकिन वितरित राशि में इनका हिस्सा 24 प्रतिशत है।
'तरुण प्लस' और बढ़ी हुई लोन सीमा
उद्यमियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सरकार ने अब 'तरुण प्लस' श्रेणी की शुरुआत की है। यह उन सफल कारोबारियों के लिए है जो अपने पुराने 'तरुण' ऋण को समय पर चुका चुके हैं।
नई सीमा: वित्त मंत्री द्वारा बजट घोषणा के बाद, अब मुद्रा लोन की अधिकतम सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है।
गारंटी: इन ऋणों पर 'क्रेडिट गारंटी फंड फॉर माइक्रो यूनिट्स' (CGFMU) के माध्यम से गारंटी कवर भी प्रदान किया जाता है, जिससे बैंकों को ऋण देने में आसानी होती है।
किन क्षेत्रों को मिलता है लाभ?
यह योजना केवल मैन्युफैक्चरिंग या ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है। सर्विस सेक्टर के साथ-साथ अब कृषि से संबद्ध गतिविधियां जैसे डेयरी, पोल्ट्री फार्मिंग और मधुमक्खी पालन के लिए भी वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ये ऋण व्यावसायिक बैंकों, एनबीएफसी (NBFC) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFI) के माध्यम से सीधे प्राप्त किए जा सकते हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और आधिकारिक आंकड़ों व समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। ऋण की पात्रता, ब्याज दरें और आवेदन प्रक्रिया बैंक दर बैंक और सरकारी नियमों के अनुसार समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी ऋण के लिए आवेदन करने से पहले अपने नजदीकी बैंक या आधिकारिक 'मुद्रा' पोर्टल पर जाकर नवीनतम जानकारी और नियमों की जांच अवश्य करें। यह पोर्टल किसी भी वित्तीय निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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