हस्तिनापुर में भगवान परशुराम जयंती की धूम: 22वें भव्य महोत्सव की तैयारियां पूर्ण, उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब

पौराणिक नगरी हस्तिनापुर में 19 अप्रैल को 22वीं भगवान परशुराम जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा। भगवान परशुराम जागृति समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे की तैयारी की गई है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है, जिससे स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

हस्तिनापुर नगर पंचायत अध्यक्ष सुधा खटीक को निमंत्रण देते आयोजक। फोटोः यूपी आज लाइव

हस्तिनापुर में भगवान परशुराम जयंती की धूम: 22वें भव्य महोत्सव की तैयारियां पूर्ण, उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर में आगामी 19 अप्रैल को भगवान परशुराम जयंती का 22वां भव्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा। भगवान परशुराम जागृति समिति के नेतृत्व में होने वाले इस गरिमामयी कार्यक्रम में सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे के माध्यम से सनातन संस्कृति की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाने की व्यापक तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

पौराणिक नगरी हस्तिनापुर में आस्था और शौर्य का संगम

ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हस्तिनापुर की धरा एक बार फिर शौर्य और तप के प्रतीक भगवान परशुराम के जयघोष से गुंजायमान होने को तैयार है। आगामी 19 अप्रैल को आयोजित होने वाली भगवान परशुराम जयंती केवल एक तिथि का उत्सव नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब है। भगवान परशुराम जागृति समिति पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस परंपरा को संजोए हुए है। इस वर्ष का आयोजन विशेष इसलिए है क्योंकि यह अपनी स्थापना के 22वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष दर्शन भारद्वाज और उपाध्यक्ष पंकज भारद्वाज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं की टोलियां हस्तिनापुर के प्रत्येक मोहल्ले, गली और आसपास के ग्रामीण अंचलों में जनसंपर्क कर रही हैं। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य इस पावन अवसर पर युवाओं को यह संदेश देना है कि भगवान परशुराम का जीवन शस्त्र और शास्त्र के संतुलित समन्वय का अनुपम उदाहरण है।

सुंदरकांड पाठ और विशाल भंडारे के माध्यम से सामाजिक समरसता

इस भव्य महोत्सव की रूपरेखा अत्यंत विस्तृत और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। कार्यक्रम का शुभारंभ हस्तिनापुर स्थित प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर के प्रांगण में प्रातः 9:00 बजे सुंदरकांड के सस्वर पाठ के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकांड का पाठ आत्मविश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसके पश्चात भगवान परशुराम के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला जाएगा। इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन एक विशाल भंडारे के साथ होगा, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। यह भंडारा केवल भोजन वितरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जाति और संप्रदाय की सीमाओं को तोड़कर सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव का एक बड़ा मंच बनकर उभरता है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस आयोजन के माध्यम से समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोना चाहते हैं।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और भविष्य की संभावनाएं

भविष्य की दृष्टि से हस्तिनापुर में भगवान परशुराम जयंती का यह निरंतर आयोजन इस क्षेत्र को 'धार्मिक पर्यटन सर्किट' के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। जिस प्रकार पिछले 22 वर्षों में इस कार्यक्रम का स्वरूप विस्तृत हुआ है, वह दर्शाता है कि आगामी वर्षों में यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में से एक बन जाएगा। इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को शस्त्र और शास्त्र की विद्या के महत्व को समझने का अवसर मिल रहा है। मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह गर्व का विषय है कि हस्तिनापुर जैसे गौरवशाली स्थान पर भगवान परशुराम की विरासत को इतने सम्मान के साथ सहेजा जा रहा है। आने वाले समय में यहाँ एक स्थायी शोध केंद्र या संग्रहालय की स्थापना की मांग भी उठ सकती है, जो भगवान परशुराम के जीवन से जुड़े तथ्यों को संरक्षित कर सके।

निष्कर्ष

हस्तिनापुर में भगवान परशुराम जयंती की यह तैयारियां इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिकता की दौड़ में भी हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ें अत्यंत गहरी हैं। 19 अप्रैल का यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और शक्ति का एक ऐसा त्रिवेणी संगम होगा, जो समाज को नई दिशा प्रदान करेगा। भगवान परशुराम जागृति समिति का यह प्रयास सराहनीय है क्योंकि वे न केवल एक उत्सव मना रहे हैं, बल्कि हस्तिनापुर की पौराणिक गरिमा को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने का कार्य भी कर रहे हैं। इस गरिमामयी अवसर पर हस्तिनापुर की जनता का उत्साह यह सुनिश्चित करता है कि यह 22वां महोत्सव इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा।

टिप्पणियाँ