मेरठ कचहरी परिसर में शनिवार को भगवान परशुराम जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। हाईकोर्ट बेंच मिशन के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा एडवोकेट की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं ने भगवान के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके सिद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया। विशाल भंडारे में सैकड़ों अधिवक्ताओं और वादकारियों ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन न्यायपालिका के माहौल में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने की एक सफल कड़ी साबित हुआ।
भगवान परशुराम जी के चित्र के समक्ष पुष्प भेंट करते अतिथिगण। फोटोः यूपी आज लाइव
मेरठ कचहरी में भगवान परशुराम जयंती की धूम: न्याय के आंगन में गूंजा सामाजिक समरसता का संकल्प
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ कचहरी परिसर में शनिवार को भगवान परशुराम जयंती का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहाँ अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता भगवान परशुराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
न्याय के प्रांगण में सांस्कृतिक चेतना का संचार
ऐतिहासिक मेरठ जनपद की कचहरी, जो सामान्यतः कानूनी बहसों और वाद-विवादों का केंद्र रहती है, शनिवार को पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंगी नजर आई। भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर बार एसोसिएशन कार्यालय के समीप स्थित पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम ने न्याय के क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पार्जन के साथ हुआ, जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे वे अन्याय के विरुद्ध कठोर और न्याय के प्रति सदैव समर्पित रहे। मुख्य आयोजक और हाईकोर्ट बेंच मिशन के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा एडवोकेट ने इस अवसर पर प्रतीकात्मक रूप से तहारी का भोग लगाकर विशाल भंडारे की शुरुआत की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं था, बल्कि यह उस न्यायप्रियता की याद दिलाता है जिसकी शपथ प्रत्येक अधिवक्ता अपने पेशेवर जीवन में लेता है।
सामाजिक समरसता और भंडारे का भव्य स्वरूप
कचहरी परिसर में आयोजित इस विशाल भंडारे ने सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल पेश की। दोपहर बाद शुरू हुए इस आयोजन में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं के साथ-साथ उनके कनिष्ठ सहायकों, कचहरी स्टाफ और दूर-दराज से आए वादकारियों ने पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। मेरठ कचहरी में वादकारियों की एक बड़ी संख्या ग्रामीण और मध्यम वर्गीय क्षेत्रों से आती है, उनके लिए इस प्रकार के सामुदायिक भोज न केवल एक सुविधा हैं, बल्कि यह न्यायपालिका और जनता के बीच के मानवीय संबंधों को भी प्रगाढ़ करते हैं। भंडारे की व्यवस्था में जिस प्रकार का अनुशासन और सेवा भाव देखा गया, वह मेरठ की साझा संस्कृति और 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा को चरितार्थ करता है। नरेंद्र शर्मा एडवोकेट ने सभी उपस्थित सहयोगियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव धर्म और सत्य की रक्षा के लिए ही होना चाहिए।
भगवान परशुराम जयंती का मेरठ कचहरी में मनाया जाना यह संदेश देता है कि न्याय की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी केवल तटस्थता का प्रतीक है, संवेदनहीनता का नहीं। सत्य, साहस और मर्यादा के प्रतीक भगवान परशुराम के आदर्श आज के कानूनी परिवेश में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। नरेंद्र शर्मा एडवोकेट और उनकी टीम द्वारा किया गया यह प्रयास प्रशंसनीय है क्योंकि यह कानून के रक्षकों को उनके नैतिक दायित्वों की याद दिलाता है। विशाल भंडारे के माध्यम से सेवा का जो प्रकल्प चलाया गया, वह निश्चित रूप से मेरठ की गौरवशाली परंपरा को और समृद्ध बनाता है। अंततः, ऐसे आयोजन ही समाज में उस विश्वास को जीवंत रखते हैं कि न्याय का मंदिर केवल फाइलों और तारीखों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षक है।


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