मेरठ में कांग्रेसियों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई को दी श्रद्धांजलि
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। बुढ़ाना गेट स्थित कांग्रेस कमेटी कार्यालय में रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मोहसिना किदवई के निधन पर एक भावपूर्ण शोक सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके सार्वजनिक जीवन में किए गए योगदान को याद किया। यह आयोजन उनके लंबे राजनीतिक जीवन और समाज सेवा को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया।
सादगी और समर्पण की प्रतीक थीं मोहसिना किदवई
शोक सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोहसिना किदवई का व्यक्तित्व सादगी, निष्ठा और सेवा भाव का अद्भुत उदाहरण था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा जनहित को प्राथमिकता दी और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को राजनीति में बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी। उनके कार्यों का प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
मेरठ में कांग्रेसियों ने दी एकजुटता की मिसाल
मोहसिना किदवई श्रद्धांजलि सभा में मेरठ के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता महानगर अध्यक्ष ने की, जबकि संचालन सलीम पठान द्वारा किया गया।
इस दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष जाहिद अंसारी, वरिष्ठ कांग्रेसी आदित्य शर्मा, योगेंद्र सिंघल, हरिकिशन वर्मा, राकेश मिश्रा, महेंद्र गुर्जर, कमल जायसवाल, सलीमुद्दीन, शाह, रीना शर्मा, पीयूष रस्तोगी, सचिन शर्मा, मतीन अंसारी, निसार अब्बासी, राकेश शर्मा, तेजपाल डाबका, प्रेम प्रकाश शर्मा, संजय शर्मा, विनोद, मनोज हरित, मगन शर्मा, विनोद शर्मा, फिरोज अंसारी, राकेश त्यागी और संजय वर्मा सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोहसिना किदवई के निधन का प्रभाव केवल कांग्रेस पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर भी पड़ा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से उठाया और समाधान के लिए प्रयास किए।
उनकी राजनीति में सादगी और शालीनता की जो परंपरा थी, वह आज के दौर में एक आदर्श के रूप में देखी जाती है। उनके जाने से राजनीति में एक ऐसा स्थान खाली हुआ है, जहां अनुभव और संवेदनशीलता का संतुलन देखने को मिलता था। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि उनके जैसे अनुभवी नेताओं की कमी से पार्टी संगठन को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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