वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, मेरठ की पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री का 93 वर्ष में देहांत
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन: मेरठ से तीन बार सांसद रहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ने ली अंतिम सांस
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। भारतीय राजनीति की दिग्गज चेहरा और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। मेरठ से तीन बार सांसद और केंद्र में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालने वाली किदवई ने बुधवार सुबह अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है और तमाम बड़े नेताओं ने इसे भारतीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
गांधी परिवार की बेहद करीबी थीं मोहसिना किदवई
बाराबंकी में 1 जनवरी 1932 को जन्मी मोहसिना किदवई का राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्हें गांधी परिवार के सबसे विश्वसनीय स्तंभों में से एक माना जाता था। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने न केवल अपनी निष्ठा साबित की बल्कि प्रशासनिक दक्षता का भी परिचय दिया। केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने स्वास्थ्य, शहरी विकास, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों का कार्यभार संभाला और कई दूरगामी नीतियों को लागू करने में अहम भूमिका निभाई। सार्वजनिक जीवन में उनकी सक्रियता और सौम्य व्यवहार के कारण विपक्ष के नेता भी उनका काफी सम्मान करते थे।
मेरठ संसदीय क्षेत्र से रहा गहरा नाता
मोहसिना किदवई और मेरठ का संबंध बेहद खास रहा है। उन्होंने मेरठ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व तीन बार किया, जो उनकी लोकप्रियता का प्रमाण था। सबसे पहले वह 1978 के चर्चित उपचुनाव में जीतकर संसद पहुंचीं, जिसके बाद 1980 और 1984 के आम चुनावों में भी मेरठ की जनता ने उन पर अटूट भरोसा जताया। मेरठ के विकास कार्यों में उनकी रुचि और स्थानीय कार्यकर्ताओं से उनका सीधा जुड़ाव आज भी याद किया जाता है। लोकसभा के अलावा वह छत्तीसगढ़ से दो बार राज्यसभा सदस्य भी चुनी गईं, जहाँ उनका कार्यकाल 2004 से 2016 तक रहा।
संगठन और सरकार में निभाई महत्वपूर्ण भूमिकाएं
मोहसिना किदवई केवल एक जननेता ही नहीं बल्कि एक कुशल संगठनकर्ता भी थीं। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में महासचिव के पद पर रहते हुए पार्टी को मजबूती प्रदान की। वह कांग्रेस कार्य समिति (CWC) और केंद्रीय चुनाव समिति की महत्वपूर्ण सदस्य रहीं, जहाँ टिकट वितरण और नीति निर्धारण में उनकी राय को काफी महत्व दिया जाता था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हज कमेटी की अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य किया।
अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर वर्तमान में नोएडा में रखा गया है। उनके परिजनों के अनुसार, नोएडा के सेक्टर 40 स्थित उनके निजी आवास से आज दोपहर 3 बजे उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी। इसके पश्चात, शाम 5 बजे दिल्ली के ऐतिहासिक निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे खाक किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश के तमाम बड़े कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के पहुंचने की संभावना है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और यातायात के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
मोहसिना किदवई के निधन का राजनीतिक प्रभाव
मोहसिना किदवई का जाना कांग्रेस पार्टी के लिए एक पुराने और अनुभवी युग का अंत है। उनके निधन से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने एक ऐसा चेहरा खो दिया है जो पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच सेतु का काम करता था। आने वाले दिनों में उनके द्वारा किए गए कार्यों और उनकी विरासत को याद करते हुए विभिन्न राजनीतिक दल शोक सभाओं का आयोजन कर सकते हैं। महिला सशक्तिकरण और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के लिए वह हमेशा एक प्रेरणा स्रोत बनी रहेंगी।
निष्कर्ष
मोहसिना किदवई का लंबा और बेदाग राजनीतिक जीवन सुचिता और सेवा का प्रतीक रहा है। मेरठ की गलियों से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक, उन्होंने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। स्वास्थ्य से लेकर विमानन मंत्रालय तक उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी के राजनेताओं के लिए मार्गदर्शक रहेंगी। उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में उनके योगदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकेगा।

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