मेरठ के सुभाष बाजार में सोमवार तड़के लगी भीषण आग में दो दुकानें जलकर खाक हो गईं, जिससे लगभग 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ। आग की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन देरी को लेकर सवाल उठे हैं। यह घटना पुराने बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है और भविष्य के लिए सतर्क रहने का संदेश देती है।
मेरठ सुभाष बाजार आग हादसा: भीषण आग से दो दुकानें राख, लाखों का नुकसान
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। आग हादसा सोमवार तड़के उस समय सामने आया जब कोतवाली क्षेत्र के व्यस्त बाजार में अचानक लगी भीषण आग ने दो दुकानों को पूरी तरह जला दिया। सुबह लगभग साढ़े चार बजे शुरू हुई इस आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया, जिससे लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच अभी जारी है। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर के पुराने बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करने वाली चेतावनी भी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मोहसिन की इनवर्टर-बैटरी की दुकान से अचानक धुआं उठता देखा गया। कुछ ही क्षणों में आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। इनवर्टर और बैटरियों में मौजूद ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। पास ही स्थित आबिद की कपड़े की दुकान भी आग की चपेट में आ गई और वहां रखा कपड़ा, फर्निशिंग सामग्री और अन्य सामान जलकर पूरी तरह नष्ट हो गया।
स्थानीय लोगों ने शुरुआत में खुद आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि वे असहाय हो गए। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दो गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया। हालांकि, तब तक दोनों दुकानों में रखा अधिकांश सामान जल चुका था। स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सूचना देने के बावजूद टीम को पहुंचने में लगभग 20 मिनट का समय लग गया, जिससे नुकसान बढ़ गया।
पुराने बाजारों में बढ़ता खतरा और सुरक्षा की जरूरत
सुभाष बाजार जैसे पुराने बाजारों में संकरी गलियां, बिजली के जटिल तार और अग्निशमन की सीमित व्यवस्था अक्सर खतरे को बढ़ा देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बाजारों में नियमित विद्युत जांच, अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और आपातकालीन निकासी मार्ग का होना बेहद जरूरी है। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।
इस घटना के बाद प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह शहर के बाजारों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करे। व्यापारियों को भी जागरूक होना होगा और अपनी दुकानों में सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। यदि समय रहते उचित कदम उठाए गए, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। साथ ही, बीमा और सुरक्षा प्रशिक्षण जैसे उपाय भी व्यापारियों के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं।

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