मेरठ में खाकी पर 'दाग': मोहिद्दीनपुर चौकी इंचार्ज पर बर्बरता का आरोप, समझौते के बजाय मिलीं लाठियां
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। थाना परतापुर क्षेत्र की मोहिद्दीनपुर चौकी के इंचार्ज सत्यम दीक्षित पर एक परिवार ने बेरहमी से मारपीट, गाली-गलौज और पद के दुरुपयोग का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का दावा है कि वे आपसी विवाद में समझौते की गुहार लेकर पुलिस के पास गए थे, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उन्हें लाठियों से पीटा गया और अपमानित किया गया।
मोहिद्दीनपुर चौकी में 'मित्र पुलिस' का हिंसक चेहरा
मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मोहिद्दीनपुर चौकी में हुई इस घटना ने स्थानीय स्तर पर पुलिस के प्रति भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद को खत्म करने के उद्देश्य से दोनों पक्ष समझौते के लिए पुलिस चौकी पहुँचे थे। पीड़ितों का आरोप है कि चौकी इंचार्ज सत्यम दीक्षित ने उनकी समस्या सुनने या शांतिपूर्ण समाधान निकालने के बजाय आपा खो दिया और उन पर लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। आरोप है कि वर्दी के नशे में चूर दारोगा ने न केवल लात-घूंसे चलाए बल्कि महिलाओं और बुजुर्गों के सामने भद्दी-भद्दी गालियां भी दीं।
समझौते की जगह 151 का चालान और दहशत का माहौल
पुलिसिया बर्बरता यहीं नहीं रुकी, पीड़ितों का दावा है कि बेरहमी से पीटने के बाद पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए उल्टा दोनों पक्षों का शांति भंग की धारा 151 के तहत चालान कर दिया। इस कार्रवाई से पीड़ित परिवार पूरी तरह दहशत में आ गया है। उनका कहना है कि वे पुलिस के पास इस विश्वास के साथ गए थे कि खाकी उनकी मदद करेगी, लेकिन मोहिद्दीनपुर चौकी इंचार्ज का व्यवहार किसी अपराधी जैसा था। मारपीट के कारण पीड़ितों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान आए हैं, जो पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
एसएसपी कार्यालय पहुँचे पीड़ित और दिखाईं गहरे जख्मों की निशान
पुलिस की इस बर्बरता से आहत होकर पीड़ित परिवार सोमवार को मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय पहुँचा। वहां मौजूद उच्चाधिकारियों के सामने पीड़ितों ने अपनी कमीज उतारकर कमर और पैरों पर मौजूद चोट के नीले निशान दिखाए। इन जख्मों को देखकर कार्यालय में मौजूद अन्य लोग भी दंग रह गए। पीड़ितों ने रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की भीख मांगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि आरोपी चौकी इंचार्ज सत्यम दीक्षित को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय जांच बिठाकर कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
पुलिस प्रशासन का रुख और जांच के आदेश
मामला गरमाता देख मेरठ पुलिस प्रशासन अब सक्रिय हो गया है। एसएसपी कार्यालय के अधिकारियों ने पीड़ितों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार किया है। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित क्षेत्राधिकारी (CO) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वर्दी की आड़ में किसी को भी कानून हाथ में लेने या आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि जांच रिपोर्ट में चौकी इंचार्ज दोषी पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष
मेरठ में मोहिद्दीनपुर चौकी इंचार्ज पर लगे ये आरोप बेहद गंभीर हैं और यह घटना सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश पुलिस की 'मित्र पुलिस' वाली छवि को ठेस पहुँचाती है। यदि मदद मांगने वाले नागरिकों को बदले में लाठियां और गालियां मिलेंगी, तो जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा उठना तय है। अब सारा दारोमदार उच्चाधिकारियों की जांच पर टिका है। न्याय तभी सार्थक होगा जब दोषियों को उनके किए की सजा मिले और आम आदमी खुद को पुलिस के पास सुरक्षित महसूस कर सके।

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