Meerut Big News: मेरठ के 2.26 लाख जनधन खातों में एक पैसा नहीं, बैंकों ने 'मनी म्यूल' की संदिग्ध श्रेणी में डाला
Meerut Big News: मेरठ के 2.26 लाख जनधन खातों में एक पैसा नहीं, बैंकों ने 'मनी म्यूल' की संदिग्ध श्रेणी में डाला
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत वित्तीय समावेशन का सपना देख रहे बैंकिंग सेक्टर के लिए उत्तर प्रदेश के कुछ जिले बड़ी चुनौती बन गए हैं। सामने आई एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ जिले के लगभग 2.26 लाख जनधन खातों में एक भी पैसा जमा नहीं है। इन खाली खातों को अब बैंकों ने 'मनी म्यूल' (संदिग्ध खाते) की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे सुरक्षा और बैंकिंग परिचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मेरठ सहित 8 जिलों में 20 लाख खाते खाली
बैंकों द्वारा राज्य सरकार को भेजी गई नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 8 प्रमुख जिलों में लगभग 20 लाख जनधन खाते ऐसे हैं जिनमें बैलेंस शून्य है। इन जिलों में पश्चिमी यूपी के मेरठ, आगरा, बिजनौर और सहारनपुर शामिल हैं, जबकि पूर्वांचल के आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और कुशीनगर में भी यही स्थिति बनी हुई है।
मेरठ की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ 2.26 लाख खातों में लंबे समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, इन खाली खातों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या कहीं अधिक है।
बैंकों पर सालाना 700 करोड़ रुपये का बोझ
एक जनधन खाते को सक्रिय रखने और उसका रिकॉर्ड मेनटेन करने के लिए बैंकों को आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों के वेतन और शाखा के रखरखाव पर प्रति खाता लगभग 3500 रुपये सालाना खर्च करने पड़ते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन 8 जिलों के 20 लाख खाली खातों को व्यवस्थित रखने के चक्कर में बैंकों को हर साल लगभग 700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। मेरठ जिले का हिस्सा भी इस खर्च में काफी बड़ा है, जिससे बैंकों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
क्यों संदिग्ध श्रेणी (Money Mule) में डाले गए ये खाते?
बैंकों ने इन शून्य बैलेंस वाले खातों को 'मनी म्यूल' के रूप में चिह्नित किया है। बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधियों और साइबर ठगों की नजर अक्सर ऐसे ही खाली और निष्क्रिय पड़े खातों पर रहती है।
अवैध लेनदेन: साइबर अपराधी ठगी का पैसा इन खातों में मंगाते हैं और तुरंत निकाल लेते हैं।
केवाईसी की कमी: लंबे समय से उपयोग न होने के कारण इन खातों का केवाईसी (KYC) अपडेट नहीं होता, जिसका फायदा अपराधी फर्जी दस्तावेजों के जरिए उठाते हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग: काले धन को सफेद करने के लिए इन जनधन खातों का उपयोग एक 'पाइपलाइन' की तरह किए जाने की आशंका बनी रहती है।
जिलेवार शून्य बैलेंस वाले खातों की स्थिति
रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के उन जिलों का ब्योरा दिया गया है जहाँ जनधन खातों की स्थिति सबसे खराब है:
| जिला | शून्य बैलेंस खातों की संख्या |
| जौनपुर | 3.32 लाख |
| आजमगढ़ | 2.71 लाख |
| कुशीनगर | 2.45 लाख |
| आगरा | 2.39 लाख |
| सहारनपुर | 2.36 लाख |
| बिजनौर | 2.27 लाख |
| मेरठ | 2.26 लाख |
| गाजीपुर | 2.09 लाख |
स्थानीय जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
मेरठ जैसे व्यापारिक केंद्र में इतनी बड़ी संख्या में खातों का निष्क्रिय होना वित्तीय साक्षरता की कमी को भी दर्शाता है। सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा खातों में भेजने (DBT) के उद्देश्य से ये खाते खोले गए थे, लेकिन लेनदेन न होने से बैंक अब इनके संचालन को लेकर कड़े नियम अपना रहे हैं। यदि इन खातों में अचानक कोई बड़ी राशि आती है, तो बैंक तुरंत उसे फ्रीज कर जांच शुरू कर देंगे, जिससे वास्तविक खाताधारकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
स्पष्ट है कि जनधन खातों का सही उपयोग न होना बैंकिंग प्रणाली के लिए बोझ और सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है। प्रशासन और बैंकों को अब संयुक्त रूप से इन खाताधारकों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि इन खातों का उपयोग केवल वैध कार्यों के लिए हो सके और साइबर अपराधी इनका दुरुपयोग न कर सकें।

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