मेरठ में फ्लैट पर फर्जी लोन घोटाला: बिल्डर समेत सात पर मुकदमा दर्ज

मेरठ के गंगानगर में फ्लैट पर फर्जी लोन लेकर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें बिल्डर और बैंक अधिकारी समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। पीड़ित ने 2018 में फ्लैट खरीदा था, लेकिन उसी पर किसी अन्य के नाम से लोन ले लिया गया। यह मामला रियल एस्टेट और बैंकिंग सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है और आम लोगों के लिए सतर्कता की चेतावनी देता है।

मेरठ में फ्लैट पर फर्जी लोन घोटाला: बिल्डर समेत सात पर मुकदमा दर्ज

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। गंगानगर क्षेत्र में फ्लैट पर फर्जी लोन लेकर की गई धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें बिल्डर कंपनी और बैंक से जुड़े सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला वर्ष 2018 से जुड़ा हुआ है, लेकिन जून 2025 में पीड़ित को इसकी जानकारी मिलने पर पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ। इस घटना ने शहर में रियल एस्टेट और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गंगानगर में फ्लैट घोटाले का पूरा मामला

गंगानगर थाना क्षेत्र में रहने वाले संजय कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उन्होंने एएसजी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनाए जा रहे ‘पनाश’ नामक प्रोजेक्ट में एक दुकान बुक कराई थी। इसके लिए उन्होंने प्रारंभिक राशि जमा की थी, लेकिन बाद में कंपनी के निदेशक अचल गुप्ता ने दुकान के बजाय फ्लैट देने का प्रस्ताव रखा।

संजय कुमार ने जून 2018 में कुल 33.50 लाख रुपये जमा कराकर फ्लैट अपनी पत्नी सीमा कश्यप के नाम पर ले लिया। उन्हें विश्वास था कि उनका निवेश सुरक्षित है और जल्द ही उन्हें उनका फ्लैट मिल जाएगा। लेकिन कई वर्षों तक न तो फ्लैट की स्थिति स्पष्ट हुई और न ही किसी प्रकार की कोई आपत्ति सामने आई।

फर्जी लोन का खुलासा कैसे हुआ

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 12 जून 2025 को पीएनबी हाउसिंग के कुछ कर्मचारी संजय कुमार के घर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उक्त फ्लैट पर पहले ही वर्ष 2018 में 31.37 लाख रुपये का लोन लिया जा चुका है, और वह भी शेखर राठौर के नाम से।

यह सुनकर संजय कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस फ्लैट के लिए उन्होंने पूरी राशि चुकाई थी, वही फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैंक में गिरवी रखा गया था। यह सीधे-सीधे दोहरी बिक्री और बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला बन गया।

बिल्डर और बैंक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

इस मामले में केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि बैंक के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। बिना उचित जांच के किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर उसी संपत्ति पर लोन कैसे स्वीकृत किया गया, यह एक बड़ा सवाल है।

पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर कंपनी के निदेशक अचल गुप्ता, संजीव गोयल, अर्जित गुप्ता, विपिन कुमार, तुषार गुप्ता, कविता गुप्ता और पीएनबी हाउसिंग के शाखा प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब इस मामले की जांच शुरू हो गई है और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

आम लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

मेरठ जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की कमी उजागर होती है। इससे नए निवेशक सतर्क हो सकते हैं और बाजार में मंदी का असर भी देखने को मिल सकता है।

मेरठ का स्थानीय संदर्भ और बढ़ती चिंताएं

मेरठ में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं, खासकर गंगानगर, कंकरखेड़ा और दौराला जैसे क्षेत्रों में। लेकिन इनके साथ ही धोखाधड़ी और अधूरी परियोजनाओं के मामले भी सामने आए हैं।

स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि बिल्डरों और बैंकों के बीच मिलीभगत की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।

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