मेरठ सेंट्रल मार्केट केस: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, 15 दिन में हटाना होगा अवैध निर्माण, नहीं तो चलेगा बुलडोजर

मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई के बाद बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली है। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि 44 चिन्हित भवनों से 15 दिनों के भीतर अवैध निर्माण हटाना होगा, अन्यथा प्रशासन बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।


 सेंट्रल मार्केट मेरठ: सुप्रीम कोर्ट से व्यापारियों को नहीं मिली राहत, 15 दिन में हटाना होगा अवैध निर्माण

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। शास्त्रीनगर की प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट के मामले में बृहस्पतिवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त आदेश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथ की पीठ ने सुनवाई के दौरान व्यापारियों की दलीलों को दरकिनार करते हुए निर्देश दिया कि सील किए गए 44 व्यावसायिक भवनों से 15 दिन के भीतर अवैध हिस्सा खुद हटा लिया जाए। न्यायालय ने साफ कहा कि फ्रंट सेटबैक के साथ-साथ साइड बैक को भी नियमों के अनुसार खाली करना अनिवार्य है। यदि तय समय सीमा के भीतर भवन स्वामियों द्वारा यह कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रशासन को बुलडोजर के जरिए ध्वस्तीकरण करने की पूरी छूट होगी। इस आदेश के बाद व्यापारियों में हड़कंप मच गया है क्योंकि अब उनके पास कानूनी रूप से बचने का कोई विकल्प शेष नहीं दिखाई दे रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और शमन शुल्क पर रुख

अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान न केवल अवैध निर्माण को हटाने की बात कही, बल्कि व्यापारियों द्वारा जमा किए गए शमन शुल्क (Compounding Fees) पर भी कड़ा रुख अपनाया। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन व्यापारियों ने परिषद में शमन की धनराशि जमा की थी, उन्हें भी किसी प्रकार की विशेष राहत नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने व्यापारियों को हिदायत दी है कि वे आवास एवं विकास परिषद में जमा की गई अपनी धनराशि वापस लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। न्यायाधीशों ने इस मामले को एक मिसाल के तौर पर पेश करते हुए टिप्पणी की कि यह आदेश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवैध निर्माण करने वालों की आंखें खोलने वाला एक महत्वपूर्ण केस है।

व्यापारिक जगत में आक्रोश और मेरठ बंद का असर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पहले बुधवार को हुई सीलिंग की कार्रवाई ने शहर के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया था। आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह और एडीएम सिटी बृजेश सिंह के नेतृत्व में सात टीमों ने भारी पुलिस बल के साथ सेंट्रल मार्केट के 44 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया था। इन भवनों में बड़े शोरूम, 6 अस्पताल, 6 स्कूल और 4 बैंक्वेट हॉल संचालित हो रहे थे। इस कार्रवाई के विरोध में संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों ने एकजुट होकर बृहस्पतिवार को 'मेरठ बंद' का आह्वान किया था। व्यापारियों का तर्क है कि इस तरह की अचानक कार्रवाई से हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित होगा, लेकिन न्यायालय ने जनहित और नियमों की अनदेखी को बर्दाश्त करने से मना कर दिया है।

प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियां

अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन 15 दिनों के भीतर न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराना है। आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि वे न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन करेंगे। यदि व्यापारी स्वयं अवैध निर्माण नहीं हटाते हैं, तो 15 दिन बाद ध्वस्तीकरण का अभियान चलाया जाएगा। इस आदेश का दूरगामी प्रभाव यह होगा कि शहर के अन्य हिस्सों में भी अवैध व्यावसायिक निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्ती बढ़ेगी। अस्पतालों और स्कूलों के सील होने से आम जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है, लेकिन कानूनी रूप से वर्तमान ढांचों को बरकरार रखना अब नामुमकिन सा लग रहा है।

निष्कर्ष

सेंट्रल मार्केट मेरठ का यह प्रकरण शहरी नियोजन और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ एक बड़ी नजीर बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए आवासीय नियमों की बलि नहीं दी जा सकती। व्यापारियों के पास अब केवल 15 दिन का समय है जिसमें उन्हें कानून के दायरे में रहकर सुधार करना होगा। 14 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में प्रशासन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिससे यह तय होगा कि मेरठ का यह प्रमुख बाजार भविष्य में किस स्वरूप में नजर आएगा।

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