मेरठ सेंट्रल मार्केट मामला: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, आवास विकास चेयरमैन से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट
मेरठ सेंट्रल मार्केट मामला: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, आवास विकास चेयरमैन से 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट
मेरठ, यूपी आज लाइव। उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित सेंट्रल मार्केट में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद द्वारा अब तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने इस मामले में परिषद के चेयरमैन को निर्देश दिया है कि वे अगले 24 घंटे के भीतर हर हाल में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
आवास विकास परिषद की दलीलों को अदालत ने किया खारिज
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ताओं ने अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि विभिन्न राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रियाओं के कारण अधिकारियों की ड्यूटी लगी हुई है, जिस वजह से आदेशों के क्रियान्वयन और रिपोर्ट तैयार करने में विलंब हो रहा है। हालांकि, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथ की खंडपीठ ने इन दलीलों को पूरी तरह से नकार दिया। पीठ ने इसे अदालत की अवमानना की स्थिति मानते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट
यह पूरा विवाद सेंट्रल मार्केट की उन 1468 संपत्तियों से जुड़ा है, जो मूल रूप से आवासीय श्रेणी में आवंटित की गई थीं। वर्तमान में इन स्थानों पर बड़े शोरूम, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित की जा रही हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में 27 जनवरी को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। इस आदेश में छह सप्ताह के भीतर अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक निर्माणों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया था। समय सीमा बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने पर अब अदालत ने जवाबदेही तय करने का मन बना लिया है।
चेयरमैन को कल सुबह तक रिपोर्ट दाखिल करने का अल्टीमेटम
अदालत ने आवास एवं विकास परिषद के चेयरमैन को विशेष रूप से तलब करते हुए गुरुवार सुबह 10:30 बजे तक की समय सीमा निर्धारित की है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में पूछा कि जब पूर्व में ध्वस्तीकरण के स्पष्ट आदेश दिए जा चुके थे, तो अब तक उसकी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष क्यों नहीं पहुंची। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक रिपोर्ट पेश नहीं की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी न्यायिक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
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