मेरठ सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर कार्रवाई का संकट: भारी आक्रोश, महिलाओं ने किया हनुमान चालीसा पाठ

मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माण के विरुद्ध नोटिस जारी किए जाने से व्यापारियों में हड़कंप मचा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेटबैक उल्लंघन पर होने वाली संभावित बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में स्थानीय महिलाओं ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया है। प्रशासन जहां विधिक कार्रवाई की तैयारी में है, वहीं व्यापारी अपनी आजीविका बचाने के लिए गुहार लगा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

फाइल फोटो।

मेरठ सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर कार्रवाई का संकट: भारी आक्रोश, महिलाओं ने किया हनुमान चालीसा पाठ

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। शास्त्री नगर स्थित प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माण और सेटबैक उल्लंघन के विरुद्ध प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई ने क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद जारी हुए नोटिसों से व्यापारियों में अपने भविष्य को लेकर दहशत है, जिसके विरोध में स्थानीय महिलाओं ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर आध्यात्मिक प्रतिरोध शुरू कर दिया है।

मेरठ सेंट्रल मार्केट में गहराता प्रशासनिक संकट और व्यापारियों की चिंता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शुमार मेरठ का सेंट्रल मार्केट इस समय प्रशासनिक रडार पर है। आवास विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए बाजार के दर्जनों प्रतिष्ठानों पर नोटिस चस्पा कर दिए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन निर्माणों पर केंद्रित है जिन्होंने निर्धारित सेटबैक का उल्लंघन किया है या बिना मानचित्र स्वीकृति के अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया है। दशकों से स्थापित इस बाजार के व्यापारियों का तर्क है कि अचानक इस तरह की सख्ती उनके परिवार और आजीविका को पूरी तरह उजाड़ देगी। दिल्ली-एनसीआर के नजदीकी व्यापारिक हब होने के कारण इस बाजार की आर्थिक महत्ता बहुत अधिक है, जिससे यहां की किसी भी कार्रवाई का असर शहर की संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।

आध्यात्मिक प्रतिरोध और महिलाओं का सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ

जैसे ही प्रशासन की ओर से कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हुई, सेंट्रल मार्केट का माहौल पूरी तरह बदल गया। विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में एक नया मोड़ तब आया जब क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर सड़क पर ही हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया। इस शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली विरोध का उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचना और संकट की इस घड़ी में दैवीय सहायता की प्रार्थना करना है। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से यहां काम कर रहे हैं और समय-समय पर सभी करों का भुगतान करते आए हैं, ऐसे में उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। मौके पर बढ़ते तनाव को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सेटबैक उल्लंघन के विधिक निहितार्थ

यह संपूर्ण प्रकरण केवल स्थानीय अतिक्रमण का नहीं, बल्कि विधिक जटिलताओं का परिणाम है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में शहरी नियोजन और मास्टर प्लान के अनुपालन को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं। सेंट्रल मार्केट में सेटबैक उल्लंघन का अर्थ है कि दुकानदारों ने सड़क और भवन के बीच छोड़ी जाने वाली निर्धारित खाली जगह पर भी निर्माण कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेरठ जैसे घनी आबादी वाले शहरों में यह समस्या आम है, लेकिन जब मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच जाता है, तो स्थानीय प्रशासन के पास कार्रवाई के अलावा कम ही विकल्प बचते हैं। हालांकि, व्यापारियों की मांग है कि उन्हें 'शमन शुल्क' (Compounding Fee) जमा कर निर्माण को वैध कराने का अवसर दिया जाए, जैसा कि पूर्व में कई अन्य योजनाओं में किया गया है।

मेरठ सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर की आहट ने न केवल व्यापारियों की रातों की नींद उड़ा दी है, बल्कि यह विकास बनाम विरासत के संघर्ष को भी रेखांकित कर रहा है। प्रशासन जहां न्यायालय के आदेशों के प्रति जवाबदेह है, वहीं व्यापारियों की दशकों पुरानी आजीविका का प्रश्न भी अत्यंत संवेदनशील है। इस समय आवश्यकता एक ऐसे मध्यमार्ग की है जहां कानून का सम्मान भी बना रहे और हजारों परिवारों का रोजगार भी सुरक्षित रहे। आने वाले दिन इस विवाद की दिशा और क्षेत्र की शांति के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होंगे।

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