मेरठ का सेंट्रल मार्केट खाली कराने की कार्रवाई शुरू: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन
मेरठ का सेंट्रल मार्केट खाली कराने की कार्रवाई शुरू: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट को खाली कराने की प्रक्रिया प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और अवमानना की चेतावनी के बाद आवास विकास परिषद ने पुलिस बल के साथ मिलकर आवासीय भूखंडों पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराने और इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाई तेज कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सेंट्रल मार्केट में हड़कंप
मेरठ के शास्त्रीनगर क्षेत्र में स्थित सेंट्रल मार्केट पिछले कई दशकों से विवादों के घेरे में था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश ने इसे खाली कराने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। न्यायालय ने अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए आवास विकास परिषद को निर्देशित किया है कि वह तत्काल प्रभाव से उन सभी संपत्तियों को खाली कराए जो मूल रूप से आवासीय थीं लेकिन व्यावसायिक रूप में उपयोग की जा रही थीं। प्रशासन की इस अचानक हुई सक्रियता से व्यापारियों और स्थानीय दुकानदारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि कल शाम से ही मुनादी और सामान हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए थे।
रिहायशी प्लॉट्स पर अवैध व्यावसायिक निर्माण बना कार्रवाई का आधार
इस पूरे विवाद की जड़ करीब 20 साल पुरानी है, जब शास्त्रीनगर आवासीय कॉलोनी के 44 रिहायशी प्लॉट्स पर नियमों को ताक पर रखकर कमर्शियल इमारतें खड़ी कर दी गई थीं। इन भूखंडों पर आज बड़े-बड़े स्कूल, नामी हॉस्पिटल और आलीशान शॉपिंग कॉम्प्लेक्स संचालित हो रहे हैं। आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार, इन संपत्तियों का भू-उपयोग कभी बदला ही नहीं गया था। अब प्रशासन इन अवैध रूप से बनी व्यावसायिक इमारतों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी में है, जिससे अरबों रुपये के कारोबार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
दो दशक पुराने विवाद का न्यायिक अंत
सेंट्रल मार्केट का यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेंच में उलझा रहा। रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने के बाद मामला पहले हाईकोर्ट पहुंचा और फिर व्यापारियों व प्रशासन की दलीलों के बीच सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय ने आवासीय शांति और नियमों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। वर्तमान कार्रवाई इसी न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम चरण है, जहाँ अब किसी भी प्रकार की रियायत मिलने की संभावना खत्म हो गई है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय की अवमानना से बचने के लिए ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।
कार्रवाई का स्थानीय व्यापार और भविष्य पर प्रभाव
सेंट्रल मार्केट को खाली कराए जाने का मेरठ के स्थानीय व्यापार पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। यहाँ से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है और यह मेरठ का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र बन चुका था। यदि यहाँ की दुकानें और कॉम्प्लेक्स ध्वस्त किए जाते हैं, तो करोड़ों रुपये के निवेश के साथ-साथ हजारों लोगों का रोजगार भी छिन जाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या प्रभावित पक्ष पुनर्वास की मांग करते हैं या प्रशासन बिना किसी विरोध के पूरी मार्केट को आवासीय स्वरूप में वापस लाने में सफल होता है। फिलहाल, सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
निष्कर्ष
मेरठ के सेंट्रल मार्केट पर हो रही यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि नियमों का उल्लंघन चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के दायरे से बाहर नहीं रह सकता। आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक अतिक्रमण न केवल यातायात और शांति को भंग करता है, बल्कि शहरी नियोजन के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। हालांकि मानवीय दृष्टिकोण से यह कदम दुखद लग सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना प्रशासन की विधिक मजबूरी है। यह घटना भविष्य में अवैध निर्माण करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जाएगी।
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