मेरठ में भाजपा सांसद और मंत्री के 'लापता' पोस्टर वायरल, सेंट्रल मार्केट सीलिंग पर व्यापारियों का भारी विरोध
मेरठ की सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई 44 दुकानों की सीलिंग के बाद व्यापारियों ने भाजपा के सांसद अरुण गोविल, ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर और महापौर हरिकांत अहलूवालिया के 'लापता' होने के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि रोजगार पर संकट के समय उनके जनप्रतिनिधि साथ खड़े होने के बजाय गायब हैं, जिससे क्षेत्र में भारी राजनीतिक रोष व्याप्त है।
मेरठ में भाजपा सांसद और मंत्री के 'लापता' पोस्टर वायरल, सेंट्रल मार्केट सीलिंग पर व्यापारियों का भारी विरोध
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ की प्रतिष्ठित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई सीलिंग की कार्रवाई ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। अपने रोजगार पर आए संकट से नाराज व्यापारियों ने भाजपा के स्थानीय सांसद, ऊर्जा राज्यमंत्री और महापौर के 'लापता' होने के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए हैं। व्यापारियों का आरोप है कि मुसीबत की इस घड़ी में उनके द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि जनता के बीच से नदारद हैं।
सोशल मीडिया पर पोस्टर वॉर और व्यापारियों का आक्रोश**
सेंट्रल मार्केट में 44 संपत्तियों को सील किए जाने और भविष्य में 859 संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद व्यापारियों में भारी दहशत का माहौल है। इस तनाव के बीच स्थानीय व्यापारियों ने सोशल मीडिया ग्रुप्स में भाजपा के ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, सांसद अरुण गोविल और महापौर हरिकांत अहलूवालिया के फोटो के साथ 'लापता' लिखे हुए पोस्टर साझा करने शुरू कर दिए हैं। व्यापारियों का तर्क है कि जब हजारों लोगों की आजीविका दांव पर लगी है, तब इन नेताओं की चुप्पी और अनुपस्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। शहर के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ये पोस्टर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
रोजगार पर संकट और जनप्रतिनिधियों की भूमिका
व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने इन नेताओं को भारी मतों से इसलिए चुना था ताकि वे उनके सुख-दुख के साथी बनें और उनकी समस्याओं को सदन तक पहुँचाएं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप जैन ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यापारियों ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग एक विश्वास के साथ किया था, लेकिन आज जब उन पर इतनी बड़ी विपदा आई है, तो कोई भी नेता सांत्वना देने तक नहीं पहुँचा। व्यापारियों के अनुसार, अगर केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद उनके प्रतिष्ठान बंद हो रहे हैं, तो यह जनप्रतिनिधियों की विफलता को दर्शाता है।
न्यायालय का डर या राजनीतिक दूरी
इस पूरे प्रकरण में किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव ने एक संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि कोई भी नेता जानबूझकर अपनी वोट बैंक खराब नहीं करना चाहता। चूंकि यह पूरा मामला सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से जुड़ा है, इसलिए संभवतः भाजपा के नेता न्यायालय की अवहेलना के डर से इस मामले में हस्तक्षेप करने से बच रहे हैं। हालांकि, व्यापारियों के लिए यह तर्क गले नहीं उतर रहा है। उन्हें लगता है कि सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय बनाकर इस संकट का कोई वैकल्पिक समाधान निकाला जा सकता था, लेकिन नेताओं ने उनसे दूरी बनाना ही बेहतर समझा।
भविष्य की राह और राजनीतिक प्रभाव
मेरठ के व्यापारिक गलियारों में भाजपा के प्रति पनप रहा यह असंतोष आने वाले समय में पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि जनप्रतिनिधियों ने समय रहते व्यापारियों से संवाद स्थापित नहीं किया, तो यह 'लापता' पोस्टर केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सड़क पर भी नजर आ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा के ये दिग्गज नेता व्यापारियों का भरोसा जीतने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर न्यायालय की सख्ती के बीच यह दूरी और बढ़ती जाएगी।
निष्कर्ष
मेरठ में सीलिंग की कार्रवाई केवल ईंट-पत्थर की इमारतों पर प्रहार नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका का प्रश्न बन चुका है। 'लापता' पोस्टर वायरल होना इस बात का प्रमाण है कि जनता अब अपने प्रतिनिधियों से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रियता चाहती है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और व्यापारियों के गुस्से के बीच अब गेंद पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व के पाले में है।

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