शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट विवाद: सीलिंग के विरोध में 9 अप्रैल को मेरठ बंद का आह्वान

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट विवाद: सीलिंग के विरोध में 9 अप्रैल को मेरठ बंद का आह्वान

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 44 अवैध निर्माणों को सील करने की तैयारी शुरू हुई। इस कार्रवाई के विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने बाजार बंद कर धरना-प्रदर्शन किया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त व्यापार संघ ने 9 अप्रैल को मेरठ बंद का कड़ा फैसला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बाजार में पसरा सन्नाटा

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में मंगलवार की सुबह सामान्य दिनों की तरह नहीं थी क्योंकि भारी पुलिस बल की तैनाती ने व्यापारियों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 44 अनाधिकृत निर्माणों को सील करने के निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाई। इन चिन्हित भवनों में केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि छह अस्पताल, छह स्कूल और चार बड़े बैंक्वेट हॉल भी शामिल हैं। जैसे ही सीलिंग की खबर फैली, व्यापारियों ने एकजुट होकर अपनी दुकानें बंद कर दीं और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। व्यापारियों का तर्क है कि इस तरह की अचानक कार्रवाई से हजारों लोगों का रोजगार और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

अस्पतालों और स्कूलों में अफरा-तफरी का माहौल

प्रशासनिक कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर सेंट्रल मार्केट स्थित स्कूलों और अस्पतालों पर देखने को मिला। सीलिंग की सूची में शामिल स्कूलों में प्रबंधन और प्रशासनिक टीम के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद आनन-फानन में बच्चों की छुट्टी कर दी गई। सुबह अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आए अभिभावक स्कूल बंद होने की खबर से परेशान दिखे और उनमें व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष नजर आया। वहीं दूसरी ओर, चिन्हित अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों का दाखिला अन्यत्र कराया जाए और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, जिससे मानवीय संकट की स्थिति पैदा हो गई है।

राजनीतिक बयानबाजी और संयुक्त व्यापार संघ का रुख

इस पूरे घटनाक्रम ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने मौके पर पहुंचकर व्यापारियों का समर्थन किया और सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए इसे व्यापारियों के उत्पीड़न की संज्ञा दी। शाम होते-होते जब सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश अपलोड हुआ, तो व्यापारियों की बेचैनी और बढ़ गई। इसके जवाब में संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों, नवीन गुप्ता और अजय गुप्ता पक्ष ने एक सुर में **9 अप्रैल को मेरठ बंद** रखने की घोषणा की। व्यापारियों का कहना है कि वे इस सीलिंग की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

भविष्य की चुनौतियां और प्रशासनिक कार्रवाई का प्रभाव

आवास एवं विकास परिषद की सूची में शामिल ये 44 भवन अब प्रशासन की रडार पर हैं। यदि 9 अप्रैल का मेरठ बंद सफल रहता है, तो यह शासन और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। फिलहाल, सीलिंग की आशंका के चलते कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों से कीमती सामान हटाना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन व्यापारियों के साथ कोई बीच का रास्ता निकालता है या फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सख्त रुख अख्तियार करता है। इस विवाद का सीधा असर मेरठ के स्थानीय व्यापारिक भविष्य और शहरी नियोजन के नियमों पर पड़ना तय है।

निष्कर्ष

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का यह विवाद अब केवल एक बाजार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे मेरठ शहर के व्यापारिक संगठनों को एकजुट कर दिया है। **9 अप्रैल को मेरठ बंद** का आह्वान इस संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। एक तरफ जहां कानून व्यवस्था और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की अनिवार्यता है, वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों परिवारों की आजीविका का प्रश्न खड़ा है। यदि इस मुद्दे का जल्द ही कोई ठोस और न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकला, तो शहर में तनाव की स्थिति और अधिक गहरा सकती है।

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