मेरठ बंद: सेंट्रल मार्केट सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों का महाआंदोलन, 44 भवनों पर लटकी तलवार

मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में 44 व्यावसायिक भवनों को सील किए जाने के विरोध में बृहस्पतिवार को पूरा शहर बंद रहा। व्यापारियों ने एकजुट होकर आवास विकास परिषद की कार्रवाई के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया और सरकार से इस संकट का समाधान निकालने की गुहार लगाई है। 

मेरठ बंद: सेंट्रल मार्केट में सीलिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी, कहा- 'हमारे पेट पर लात मत मारो'

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्र मेरठ में बृहस्पतिवार को सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन व्यापारियों के मन में आक्रोश की ज्वाला धधकती दिखी। शास्त्रीनगर की प्रसिद्ध सेंट्रल मार्केट में आवास एवं विकास परिषद द्वारा की गई सीलिंग की बड़ी कार्रवाई के विरोध में 'मेरठ बंद' का व्यापक असर देखने को मिला। संयुक्त व्यापार संघ के आह्वान पर शहर के विभिन्न संगठनों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और सेंट्रल मार्केट में आयोजित धरने में शामिल होकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि दशकों से स्थापित इन प्रतिष्ठानों को अचानक बंद करना उनके पेट पर लात मारने जैसा है। इस आंदोलन ने न केवल शहर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि प्रशासन और शासन के सामने एक बड़ी चुनौती भी पेश कर दी है।

बाजारों में सन्नाटा और व्यापारियों का जबरदस्त रोष

बृहस्पतिवार सुबह से ही मेरठ के माधवपुरम, परतापुर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार और बेगमपुल जैसे प्रमुख बाजारों में शटर नहीं उठे। व्यापारियों ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी ढंग से विरोध दर्ज कराया। सेंट्रल मार्केट में जुटे हजारों व्यापारियों ने आवास विकास परिषद की नीतियों को दमनकारी बताया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वे वर्षों से कमर्शियल बिजली बिल, जीएसटी और हाउस टैक्स जमा कर रहे हैं, ऐसे में अचानक उनके भवनों को अवैध बताकर सील करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। व्यापारियों के इस दर्द को साझा करने के लिए किन्नर एसोसिएशन और स्थानीय राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे, जिन्होंने इस लड़ाई को केवल व्यापारियों की नहीं बल्कि पूरे मेरठ की जनता की लड़ाई करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और 44 भवनों पर सीलिंग की गाज

इस पूरे विवाद की जड़ आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अवमानना याचिका है। न्यायालय के कड़े रुख के बाद आवास एवं विकास परिषद ने उन 44 भवनों की सूची तैयार की थी, जो पूर्णतः व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे थे। बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सात टीमों ने इन भवनों को सील कर दिया। इन प्रतिष्ठानों में केवल शोरूम ही नहीं, बल्कि 6 अस्पताल, 6 स्कूल और 4 बैंक्वेट हॉल भी शामिल हैं। जन सुविधाओं से जुड़े इन संस्थानों के सील होने से आम जनता को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिषद का कहना है कि वे केवल न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहे हैं, जबकि व्यापारियों का मानना है कि शासन स्तर पर इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो समाधान संभव है।

समर्थन में आए विभिन्न संगठन और राजनीतिक दल

आंदोलन के दौरान कांग्रेस महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा और वरिष्ठ नेता अवनीश काजला ने व्यापारियों के बीच पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले इस बाजार के बंद होने से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। दवा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल अग्रवाल ने तकनीकी पक्ष रखते हुए कहा कि जमीन व्यापारियों की अपनी है और वे वर्षों से वैध तरीके से काम कर रहे हैं, ऐसे में भू-उपयोग परिवर्तन (Land Use Change) के मसले को मानवीय आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सीलिंग नहीं खोली गई और कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण कर सकता है।

निष्कर्ष

सेंट्रल मार्केट का मुद्दा अब केवल एक कानूनी लड़ाई न रहकर एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक संकट बन चुका है। एक तरफ जहां न्यायालय के आदेशों का पालन करना प्रशासन की मजबूरी है, वहीं दूसरी तरफ हजारों लोगों के रोजगार की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। मेरठ बंद के सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि व्यापारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रदेश सरकार बीच का कोई रास्ता निकाल कर इन 44 भवनों को राहत पहुंचाती है या फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाए जाते हैं। फिलहाल, मेरठ के व्यापारियों की नजरें शासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

टिप्पणियाँ