ईरान-अमेरिका संघर्ष: 24 घंटों में अमेरिकी वायुसेना को भारी क्षति, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हुए जमींदोज
पश्चिम एशिया के युद्ध के मैदान से बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ बीते 24 घंटों में ईरान ने अमेरिकी सैन्य शक्ति को कड़ी चुनौती देते हुए दो लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया है। इस भीषण संघर्ष के बीच एक अमेरिकी पायलट लापता हो गया है जिसकी तलाश जारी है, वहीं इस घटना ने वैश्विक राजनीति और सैन्य समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष: 24 घंटों में अमेरिकी वायुसेना को भारी क्षति, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हुए जमींदोज
तेहरान, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले पांच हफ्तों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने मात्र 24 घंटों के भीतर अमेरिका के दो उन्नत लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी प्रशासन लगातार ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर रहा था। इन विमानों के गिरने और हेलीकॉप्टरों के क्षतिग्रस्त होने की खबरों ने पेंटागन की चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि एक पायलट अभी भी लापता है और उसके दुश्मन की सीमा के भीतर होने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान की धरती पर F-15E स्ट्राइक ईगल का पतन और रेस्क्यू ऑपरेशन
ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली का प्रभावी उपयोग करते हुए एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू जेट को मार गिराया है। यह विमान दो पायलटों द्वारा संचालित किया जा रहा था और ईरानी सीमा के भीतर गोलाबारी का शिकार होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने इस विमान के गिरने की पुष्टि की है। विमान के गिरने के तुरंत बाद शुरू किए गए प्रारंभिक बचाव अभियान में एक पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा पायलट अब भी लापता है। लापता पायलट की खोज के लिए चलाए गए अभियान में अमेरिका को और अधिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, जब दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर लापता पायलट की तलाश में ईरानी हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए, तो उन पर भी भारी गोलाबारी की गई। हालांकि ये हेलीकॉप्टर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि वे तकनीकी रूप से काफी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
कुवैत के ऊपर A-10 वारथोग का क्रैश और बढ़ता सैन्य दबाव
F-15E की घटना के कुछ ही घंटों के भीतर एक और बुरी खबर आई जब कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहा अमेरिकी A-10 वारथोग अटैक एयरक्राफ्ट अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह एक तकनीकी विफलता या युद्ध की परिस्थितियों से उपजा हादसा हो सकता है, लेकिन एक ही दिन में दो प्रमुख विमानों का खोना अमेरिकी वायु सेना की रणनीतिक बढ़त पर सवालिया निशान लगाता है। इस हादसे में पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए खुद को विमान से सुरक्षित इजेक्ट कर लिया और उसे बाद में रेस्क्यू टीम द्वारा बचा लिया गया। लेकिन इन दो लगातार घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ युद्ध अब अमेरिका के लिए उतना सरल नहीं रह गया है जितना पहले अनुमान लगाया गया था। इन झटकों ने न केवल सैन्य संसाधनों की हानि की है, बल्कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के मनोबल पर भी प्रभाव डाला है।
लापता पायलट पर इनाम और मनोवैज्ञानिक युद्ध की शुरुआत
ईरान ने इस सैन्य सफलता को अब एक मनोवैज्ञानिक युद्ध में बदल दिया है। ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में लापता अमेरिकी पायलट को खोजने के लिए एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। ईरान की सरकार ने स्थानीय नागरिकों के लिए एक आधिकारिक घोषणा जारी की है कि जो भी व्यक्ति लापता अमेरिकी पायलट की जानकारी देगा या उसे पकड़ने में मदद करेगा, उसे बड़ा इनाम दिया जाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का लक्ष्य जो कभी ईरान में शासन परिवर्तन करना था, वह अब सिमटकर केवल अपने लापता पायलटों को खोजने तक रह गया है। यह बयान दर्शाता है कि ईरान इस समय खुद को रणनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में देख रहा है और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को नुकसान पहुँचाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता।
राष्ट्रपति ट्रंप की प्रतिक्रिया और युद्ध के भविष्य पर प्रभाव
वाइट हाउस में पत्रकारों द्वारा पूछे गए तीखे सवालों के जवाब में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन विमानों के गिरने और पायलट के लापता होने से ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना प्रभावित होगी, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह युद्ध है और इसमें नुकसान होना संभव है, लेकिन इससे अमेरिका के इरादे नहीं बदलेंगे। हालांकि, यह स्थिति ट्रंप के उन दावों को गंभीर चुनौती देती है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के आसमान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लापता पायलट ईरान के कब्जे में आता है, तो यह अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हार होगी और ईरान इसे सौदेबाजी के लिए एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका अपने लापता सैनिक को बचाने के लिए कोई बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करता है या तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता यह संघर्ष अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तकनीक, खुफिया जानकारी और वैश्विक वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है। 24 घंटों के भीतर दो विमानों का गिरना अमेरिका के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि ईरान की रक्षा प्रणालियाँ और उसका प्रतिरोध काफी मजबूत है। लापता पायलट की स्थिति और उस पर ईरान द्वारा रखा गया इनाम इस संघर्ष को और अधिक व्यक्तिगत और तनावपूर्ण बना देता है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें उस लापता पायलट और व्हाइट हाउस के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस युद्ध की दिशा तय करेगा।

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