भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2026-27: क्या हैं नए नियम और आपसे पूछे जाने वाले 33 सवाल?

भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2026-27: क्या हैं नए नियम और आपसे पूछे जाने वाले 33 सवाल?

मेरठ, यूपी आज लाइव डेस्क।  विश्व के सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश में जनगणना के महाअभियान का शंखनाद हो चुका है। अगले कुछ महीनों के दौरान करोड़ों भारतीय नागरिक अपने परिवार, जीवनशैली और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विवरण सरकारी डेटाबेस में दर्ज कराएंगे। गौरतलब है कि भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब पूरी प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। इस बार की गणना न केवल आधुनिक तकनीक से लैस है, बल्कि इसमें नागरिकों को खुद अपनी जानकारी पोर्टल पर भरने का विशेष विकल्प भी दिया गया है। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही इस कवायद को लेकर आम जनता के मन में कई जिज्ञासाएं और सवाल हैं।

दो चरणों में संपन्न होगी पूरी प्रक्रिया

जनगणना के इस विशाल कार्य को मुख्य रूप से दो प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से हो चुकी है, जो सितंबर 2026 तक निरंतर जारी रहेगी। इस प्रारंभिक फेज में मुख्य रूप से मकानों की सूची तैयार करना और आवासीय विवरण जुटाना शामिल है। खास बात यह है कि जनगणना कर्मी के घर पहुंचने से 15 दिन पहले ही 'सेल्फ एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) का पोर्टल खोल दिया गया है।

दूसरा चरण फरवरी 2027 में क्रियान्वित किया जाएगा, जिसे वास्तविक 'जनसंख्या गणना' कहा जाता है। इस फेज में व्यक्तियों के नाम, आयु, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा और व्यवसाय जैसी विस्तृत जानकारियां संकलित की जाएंगी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब इसी चरण के दौरान डिजिटल माध्यम से जातिगत आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे। पूरे देश के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है।

इस बार क्या है नया: डिजिटल ऐप से लेकर 'लिव-इन' जोड़ों तक

इस डिजिटल जनगणना में कई क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे। अब गणना कर्मी कागजी रजिस्टरों के बजाय 16 भाषाओं वाले एक सुरक्षित मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे। सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सभी इमारतों की 'जियो-टैगिंग' की जाएगी। सामाजिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए, यदि लिव-इन कपल्स अपने संबंध को स्थायी बताते हैं, तो उन्हें शादीशुदा जोड़े के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस अभियान के लिए 'प्रगति' (महिला) और 'विकास' (पुरुष) नाम के दो विशेष शुभंकर (Mascots) भी तैयार किए गए हैं।

कैसे दर्ज कराएं अपनी जानकारी?

नागरिकों के पास जनगणना में शामिल होने के दो विकल्प मौजूद हैं। पहला तरीका 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' का है, जिसमें आप अपने मोबाइल नंबर के जरिए आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन कर खुद फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म जमा करने के बाद आपको एक यूनिक 'सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी' (SE ID) मिलेगी, जिसे बाद में सत्यापन के लिए आने वाले अधिकारी को दिखाना होगा। दूसरा पारंपरिक तरीका 'कैनवेसर' का है, जिसमें गणना अधिकारी स्वयं आपके घर आकर मोबाइल ऐप पर आपका विवरण दर्ज करेगा।

गोपनीयता और कानूनी अनिवार्यता

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रत्येक नागरिक के लिए सही जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जानकारी छुपाने या सहयोग न करने पर 1000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय और एन्क्रिप्टेड रहेगी। यह डेटा किसी भी अन्य विभाग या आरटीआई (RTI) के तहत साझा नहीं किया जा सकता और न ही अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल होगा। केवल सामूहिक आंकड़े ही सार्वजनिक किए जाएंगे।

ये हैं वो 33 प्रमुख सवाल

मकान सूचीकरण के दौरान आपसे कुल 33 प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इनमें घर की बनावट (दीवार, छत, फर्श की सामग्री), परिवार के मुखिया का विवरण, पीने के पानी का स्रोत, शौचालय की सुविधा, रसोई का ईंधन और बिजली की उपलब्धता शामिल है। इसके अलावा संपत्तियों से जुड़े सवाल जैसे टीवी, इंटरनेट, स्मार्टफोन और वाहनों (दोपहिया या चार पहिया) की जानकारी भी मांगी जाएगी। परिवार द्वारा मुख्य रूप से खाए जाने वाले अनाज का विवरण भी इस सूची का हिस्सा है।

यदि अधिकारी घर न आए तो क्या करें?

यदि आप स्व-गणना नहीं कर पाते हैं और कोई अधिकारी भी आपके घर नहीं पहुंचता है, तो आप अपने क्षेत्र के 'चार्ज ऑफिसर' से संपर्क कर सकते हैं। स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO), तहसीलदार या नगर निगम के वार्ड अधिकारी ही चार्ज ऑफिसर होते हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर जिलाधिकारी (DM) या कलेक्टर कार्यालय में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है ताकि आपका परिवार इस राष्ट्रीय गणना से वंचित न रहे।

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