पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग तेज: मुजफ्फरनगर में जनजागरण अभियान और जन आंदोलन की अपील
मुजफ्फरनगर, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के संकल्प के साथ 'हाईकोर्ट बेंच मिशन' ने मुजफ्फरनगर में एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने की शुरुआत की है। मिशन की टीम ने कचहरी परिसर से लेकर रेलवे स्टेशन और शहर के प्रमुख चौराहों पर पैम्फलेट वितरित कर जनता को इस मांग के महत्व से अवगत कराया और इसे एक बड़ा जन आंदोलन बनाने की अपील की है।
हाईकोर्ट बेंच मिशन का मुजफ्फरनगर में सघन जनसंपर्क अभियान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग दशकों पुरानी है, लेकिन अब 'हाईकोर्ट बेंच मिशन' ने इसे केवल वकीलों की मांग न रहने देकर आम आदमी की लड़ाई बनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में मिशन की टीम मुजफ्फरनगर पहुँची, जहाँ कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों के बीच संवाद स्थापित किया गया। इसके पश्चात टीम ने मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन और शहर के व्यस्ततम चौराहों पर जाकर आम नागरिकों को इस आंदोलन के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया। मिशन के सदस्यों ने राहगीरों और यात्रियों को पैम्फलेट सौंपकर यह समझाने का प्रयास किया कि प्रयागराज हाईकोर्ट की दूरी पश्चिमी यूपी के जिलों से कितनी अधिक है और इसके कारण गरीब जनता को न्याय पाने के लिए कितनी आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जागरूकता अभियान की इस टीम का नेतृत्व मिशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्र शर्मा कर रहे थे। उनके साथ जनता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विशाल कौशिक, तेजकरण, विश्वनाथ, सचिन शर्मा और जितेन्द्र जैसे सक्रिय सदस्य शामिल रहे। टीम ने जनता को बताया कि यदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की एक खंडपीठ स्थापित हो जाती है, तो मुजफ्फरनगर, मेरठ, सहारनपुर, बागपत और शामली जैसे जिलों के लोगों को मामूली तारीखों के लिए प्रयागराज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक व्यक्ति को अपने केस की पैरवी के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, जिसमें समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती है। मिशन ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी विशेष वर्ग की नहीं बल्कि हर उस नागरिक की है जो त्वरित न्याय की उम्मीद रखता है।
सस्ता और सुलभ न्याय: हाईकोर्ट बेंच की अनिवार्यता और तर्क
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग के पीछे सबसे बड़ा तर्क भौगोलिक दूरी और जनसंख्या का दबाव है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी क्षेत्र में निवास करता है, फिर भी यहाँ के लोगों को उच्च न्यायालय संबंधी कार्यों के लिए राज्य के दूसरे छोर पर जाना पड़ता है। 'हाईकोर्ट बेंच मिशन' के अध्यक्ष नरेन्द्र शर्मा एडवोकेट ने अभियान के दौरान कहा कि न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन जब न्याय इतना महंगा हो जाए कि आम आदमी उसे वहन न कर सके, तो वह व्यवस्था पर सवाल उठाता है। मुजफ्फरनगर के चौराहों पर जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से प्रयागराज की दूरी लगभग 600 से 700 किलोमीटर है, जो कई पड़ोसी राज्यों की सीमाओं से भी अधिक है।
इस भौगोलिक दूरी के कारण न केवल वादकारियों पर आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि गवाहों और सबूतों को समय पर पेश करने में भी कठिनाई आती है। मिशन की टीम ने पैम्फलेट के माध्यम से यह जानकारी साझा की कि जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच की स्थापना को उचित ठहराया गया था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह फाइल आज भी धूल फांक रही है। जनता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विशाल कौशिक ने युवाओं और व्यापारियों से इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग इस मांग के लिए सड़कों पर नहीं उतरेगा, तब तक शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूटेगी। उन्होंने मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को जागरूक करते हुए बताया कि एक गरीब किसान या मजदूर के लिए प्रयागराज जाना और वहां ठहरना मुमकिन नहीं होता, जिसके कारण कई बार लोग अपने अधिकारों की लड़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं।
जन आंदोलन की अपील और भविष्य की रणनीतिक दिशा
मुजफ्फरनगर में चलाए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आगामी समय में एक बड़े और निर्णायक आंदोलन की आधारशिला रखना है। मिशन की टीम ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट बेंच की मांग अब केवल अदालतों के बहिष्कार तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद, तहसील और ब्लॉक स्तर पर ऐसी ही कमेटियां गठित की जाएंगी जो ग्राम प्रधानों, सामाजिक संगठनों और छात्र संघों के साथ मिलकर सरकार पर दबाव बनाएंगी। मुजफ्फरनगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी मिशन की इस पहल का स्वागत किया और आश्वासन दिया कि वे इस न्याय की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलेंगे।
इस आंदोलन का प्रभाव आने वाले समय में काफी व्यापक हो सकता है। यदि यह मांग एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेती है, तो निश्चित रूप से केंद्र और राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट बेंच की स्थापना से न केवल जनता को राहत मिलेगी, बल्कि प्रयागराज स्थित मुख्य पीठ पर मुकदमों का बोझ भी कम होगा, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी। मिशन अध्यक्ष नरेन्द्र शर्मा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक मार्च निकाला जाएगा। फिलहाल, मुजफ्फरनगर की सड़कों पर शुरू हुई यह चिंगारी अब पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैलने की संभावना है।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, मुजफ्फरनगर में 'हाईकोर्ट बेंच मिशन' द्वारा चलाया गया जागरूकता अभियान इस बात का प्रतीक है कि न्याय की प्यास अब जनता के बीच भी तीव्र हो गई है। अधिवक्ताओं के नेतृत्व में शुरू हुई यह मुहिम अब आम नागरिकों की भागीदारी से एक नई शक्ति प्राप्त कर रही है। पैम्फलेट वितरण और जनसंपर्क के माध्यम से मिशन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि हाईकोर्ट बेंच केवल एक मांग नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों की जरूरत और अधिकार है। सरकार को चाहिए कि वह जनता की भावनाओं और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस दिशा में सकारात्मक पहल करे, ताकि 'न्याय सबके लिए' का नारा धरातल पर सच साबित हो सके। यदि प्रशासन इस आवाज को अनसुना करता है, तो भविष्य में यह आंदोलन शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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