असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर की गई अभद्र टिप्पणी के विरोध में शुक्रवार को मेरठ के कमिश्नरी चौराहे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। पुलिस के साथ हुई तीखी नोक-झोंक के बावजूद कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। कांग्रेस ने इस बयान को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए माफी की मांग की है, जबकि भाजपा ने इसे विपक्षी प्रोपेगेंडा करार दिया है।
असम के मुख्यमंत्री के बयान पर मेरठ में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, फूंका पुतला
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी को लेकर मेरठ में सियासी पारा चढ़ गया है। शुक्रवार को मेरठ के कमिश्नरी चौराहे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
विवादित टिप्पणी पर कांग्रेस का कड़ा आक्रोश
यूपी आज लाइव प्रतिनिधि के अनुसार, प्रदर्शन की मुख्य वजह असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का वह हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तुलना 'पागल' से करते हुए उनकी उम्र पर टिप्पणी की थी। मेरठ के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा देश की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की मर्यादाओं के भी विरुद्ध है। कार्यकर्ताओं ने कमिश्नरी चौराहे पर जमकर नारेबाजी की और भाजपा सरकार को जनविरोधी बताया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुतला फूंकने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तीखी नोक-झोंक होती रही। पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर कार्यकर्ताओं को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन आक्रोशित कांग्रेसियों ने पुलिस को छकाते हुए अंततः असम के मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर ही दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेता लगातार विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं का अपमान कर रहे हैं।
राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों का सवाल
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता पर निजी हमला करना भाजपा की हताशा को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जब विपक्ष सरकार की कमियों या भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सवाल उठाता है, तो जवाब देने के बजाय भाजपा नेता अभद्र भाषा का सहारा लेते हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हिमंता बिस्वा सरमा को अपने इस अमर्यादित बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा नेताओं की भाषा शैली में सुधार नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
आगामी घटनाक्रम और राजनीतिक प्रभाव
इस प्रदर्शन का प्रभाव आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रहे हैं ताकि भाजपा की छवि को 'अहंकारी' दल के रूप में पेश किया जा सके। दूसरी ओर, भाजपा इस मामले पर सफाई दे रही है कि मुख्यमंत्री के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, शब्दों की यह जंग और तेज होगी, जिससे ध्रुवीकरण की स्थिति पैदा हो सकती है।

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