हापुड़ सड़क हादसा: धौलाना-गुलावठी मार्ग पर बरातियों की बस से टक्कर, छह की मौत
हापुड़, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। रविवार देर रात हापुड़ के धौलाना-गुलावठी मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। बरात से लौट रही बस और सामने से आ रहे ट्रक की आमने-सामने टक्कर में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए। यह हादसा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
इस भीषण दुर्घटना में गाजियाबाद के डासना निवासी बराती शामिल थे, जो शादी समारोह से लौट रहे थे। रात के लगभग डेढ़ बजे हुए इस हादसे में टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस ट्रक के नीचे घुस गई और दोनों वाहन सड़क किनारे खाई में जा गिरे। मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
हादसे का भयावह दृश्य और राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी अभिषेक पांडे और पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कराया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाईड्रा मशीन की मदद से बस को ट्रक के नीचे से निकाला गया और फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी तेज थी कि बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। कई लोग सीटों में फंस गए थे, जिन्हें निकालने में काफी समय लगा। घायल लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
इस हादसे में सोनू, यूसुफ, अख्तर, यूनुस, मुन्ना और बस चालक अशोक की जान चली गई। मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल
यह हादसा एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है। रात के समय तेज रफ्तार, थकान और सड़क पर पर्याप्त रोशनी की कमी अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती है। धौलाना-गुलावठी मार्ग जैसे कई क्षेत्रीय मार्गों पर ट्रकों और बसों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन सुरक्षा इंतजाम उतने मजबूत नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों के लिए अनिवार्य विश्राम, गति नियंत्रण और सड़क किनारे उचित संकेतों की व्यवस्था बेहद जरूरी है। अगर इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मेरठ और गाजियाबाद जैसे नजदीकी शहरों से हापुड़ का सीधा संपर्क होने के कारण यहां यातायात का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाए और लोगों को भी जागरूक करे।

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