मेरठ: मतदाता सूची से 5 लाख नाम कटे, कैंट और दक्षिण विधानसभा में बड़ी गिरावट

मेरठ जनपद में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद कुल 5,06,183 मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं, जिससे अब कुल मतदाता 21,93,637 रह गए हैं। सबसे अधिक कटौती मेरठ कैंट और दक्षिण विधानसभा में हुई है। जिलाधिकारी आज राजनीतिक दलों को अंतिम सूची सौंपेंगे। सत्यापन के दौरान विवरण न मिलने और नोटिस का जवाब न देने वालों पर यह कार्रवाई हुई है, जबकि 1.49 लाख नए मतदाता सूची में जोड़े गए हैं।

मेरठ: मतदाता सूची से 5 लाख नाम कटे, कैंट और दक्षिण विधानसभा में बड़ी गिरावट

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। जनपद मेरठ में चुनाव आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुक्रवार को संपन्न हो गई, जिसके बाद जिले की सात विधानसभा सीटों से कुल 5,06,183 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। जिलाधिकारी द्वारा आज दोपहर जारी की जाने वाली अंतिम सूची के अनुसार अब जिले में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 21,93,637 रह गई है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और भारी कटौती का कारण

मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान के बाद जनपद मेरठ में मतदाता संख्या में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस प्रक्रिया से पहले जिले में मतदाताओं की कुल संख्या 26,99,820 थी, लेकिन सत्यापन प्रक्रिया के दौरान लगभग 6.56 लाख लोगों के विवरण में विसंगतियां पाई गईं। मुख्य रूप से वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न होने और नोटिस के बावजूद साक्ष्य प्रस्तुत न करने के कारण बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं। हालांकि, इस अभियान के सकारात्मक पहलू के रूप में 1,49,767 नए मतदाताओं को सूची में शामिल भी किया गया है, जिससे युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।

कैंट और दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा उलटफेर

एसआइआर प्रक्रिया के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सबसे अधिक प्रभाव भारतीय जनता पार्टी के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में देखा गया है। मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 1,21,727 मतदाताओं की कमी आई है, वहीं मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से 1,18,280 नाम हटाए गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का कम होना आने वाले चुनावों में हार-जीत के अंतर और दलीय समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। शेष पांच विधानसभा क्षेत्रों में भी नामों की कटौती हुई है, लेकिन कैंट और दक्षिण की तुलना में वहां का आंकड़ा कम है।

सत्यापन प्रक्रिया और प्रशासन की मुस्तैदी

जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. वीके सिंह ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रशासन ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई थी। लगभग 6.48 लाख मतदाताओं के विवरण में अंतर मिलने पर 200 से अधिक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की देखरेख में सुनवाई की गई। 27 मार्च तक चली इस लंबी प्रक्रिया में नोटिस जारी कर मतदाताओं को पक्ष रखने का मौका दिया गया था। निर्धारित अवधि तक साक्ष्य न देने वालों और गणना प्रपत्र न भरने वालों के नाम आयोग के पोर्टल पर डेटा लॉक होने के बाद अंतिम रूप से हटा दिए गए हैं।

राजनीतिक दलों पर प्रभाव और आगामी चुनौतियां

मतदाता सूची से पांच लाख नामों का हटना जिले की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला है। आज शुक्रवार को जब जिलाधिकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को इस सूची की प्रति सौंपेंगे, तो नामों की कटौती पर विवाद बढ़ना तय माना जा रहा है। विपक्षी और सत्ताधारी दोनों ही दलों के लिए अब यह चुनौती होगी कि वे अपने छूटे हुए वास्तविक समर्थकों के नाम पुनः जुड़वाने के लिए नए सिरे से प्रयास करें। इस कटौती का सीधा असर मतदान प्रतिशत और प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति पर पड़ना निश्चित है।

निष्कर्ष

जनपद मेरठ में मतदाता सूची का यह शुद्धिकरण अभियान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, पांच लाख मतदाताओं का एक साथ कम होना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय है। अब नई सूची के आधार पर ही भविष्य की चुनावी बिसात बिछाई जाएगी। जनता और राजनीतिक दलों को अब इस अंतिम सूची के अनुसार अपनी भावी रणनीति तैयार करनी होगी ताकि वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

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