मखदूमपुर गंगा हादसा: एनडीआरएफ ने बरामद किए 3 शव, प्रियांशु की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी
मेरठ, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में स्थित मखदूमपुर गंगा घाट पर शुक्रवार को हुए एक दर्दनाक हादसे में डूबे चार युवकों में से तीन के शव एनडीआरएफ की टीम ने शनिवार शाम तक बरामद कर लिए हैं। अभिषेक, दीपांशु और हिमांशु के शव मिलने के बाद घाट पर कोहराम मच गया है, जबकि चौथे युवक प्रियांशु की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी युद्धस्तर पर जारी है।
मखदूमपुर गंगा घाट पर रेस्क्यू ऑपरेशन और एनडीआरएफ की कार्रवाई
हस्तिनापुर के ऐतिहासिक मखदूमपुर गंगा घाट पर शुक्रवार को खुशियों का माहौल उस समय मातम में बदल गया जब स्नान के दौरान चार गहरे दोस्त गंगा की तेज लहरों में समा गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और गोताखोर मौके पर पहुंचे थे, लेकिन सफलता न मिलने पर एनडीआरएफ की मदद ली गई। शनिवार की सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स की टीम ने अपने आधुनिक उपकरणों और स्टीमर के साथ गंगा की लहरों को चीरना शुरू किया। करीब 11 बजे टीम को पहली सफलता मिली जब अभिषेक का निष्प्राण शरीर पानी से बाहर निकाला गया। इसके बाद भी बचाव दल ने हार नहीं मानी और मखदूमपुर गंगा हादसे के अन्य शिकार हुए युवाओं की तलाश जारी रखी।
दोपहर का वक्त होते-होते घाट पर ग्रामीणों और परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिनकी आंखों में आंसू और दिल में कोई चमत्कार होने की उम्मीद बची थी। करीब साढ़े तीन बजे एनडीआरएफ के गोताखोरों ने दीपांशु का शव बरामद किया, जिसके बाद परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। प्रशासन के लिए स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया क्योंकि लोग सुरक्षा इंतजामों को लेकर आक्रोशित थे। इसके बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं थमा और शाम करीब सवा चार बजे तीसरे युवक हिमांशु का शव भी गंगा के गहरे जलस्तर के बीच से खोज निकाला गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर ही पंचनामा भरकर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी।
गंगा घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासन की चुनौतियां
मखदूमपुर गंगा हादसे ने एक बार फिर से उन सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है जो अक्सर ऐसे पवित्र स्नान स्थलों पर देखने को मिलती हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घाट पर गहरे पानी की चेतावनी के बोर्ड नहीं लगे थे और न ही बैरिकेडिंग की पर्याप्त व्यवस्था थी। हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा का बहाव अनिश्चित रहता है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भी काफी दिक्कतें आती हैं। शनिवार को सर्च अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम को जलकुंभी और पानी के नीचे की सिल्ट के कारण काफी मशक्कत करनी पड़ी। एसडीएम और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर डेरा डाल रखा है ताकि चौथे युवक प्रियांशु की तलाश में कोई कसर न रहे।
प्रशासन का कहना है कि चौथे युवक प्रियांशु की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है। चूंकि गंगा का बहाव तेज है, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि शव बहाव के साथ काफी दूर निकल गया होगा। एनडीआरएफ की टीम ने स्टीमर की मदद से घटनास्थल से कई किलोमीटर आगे तक जाल बिछाया है और स्थानीय गोताखोरों की भी मदद ली जा रही है। संतोष कुमार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि तीन शव मिल चुके हैं और प्रियांशु को ढूंढने के लिए अंधेरा होने तक और जरूरत पड़ने पर अगले दिन भी अभियान जारी रहेगा। इस हादसे ने मखदूमपुर क्षेत्र में सन्नाटा पसरा दिया है और हर कोई प्रियांशु की सलामती या कम से कम उसका अंतिम दर्शन करने की प्रार्थना कर रहा है।
मखदूमपुर हादसे का प्रभाव और आगे की सुरक्षा योजना
इस हृदयविदारक घटना का प्रभाव न केवल पीड़ित परिवारों पर बल्कि पूरे मेरठ जनपद पर पड़ा है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में अब भय का माहौल है। इस हादसे के बाद अब यह मांग तेज हो गई है कि मखदूमपुर जैसे संवेदनशील घाटों पर स्थायी रूप से जल पुलिस की तैनाती की जाए और गहरे पानी वाले क्षेत्रों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए। आने वाले समय में प्रशासन गंगा के इन घाटों पर सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने और लाइफ जैकेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा ऑडिट किया गया होता, तो शायद इन चार नौजवानों की जान बच सकती थी।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी रोष है कि हर साल ऐसे हादसों के बावजूद सुरक्षा के स्थायी प्रबंध नहीं किए जाते। अब प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर मुनादी कराकर लोगों को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी देनी शुरू कर दी है। इसके अलावा, घाट के किनारे की रेतीली जमीन और पानी के अचानक बढ़ते स्तर की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हो रही है। इस हादसे से सबक लेते हुए जिला प्रशासन आने वाले स्नान पर्वों और मेलों के लिए एक नई सुरक्षा नियमावली तैयार कर सकता है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के असहनीय दुख का सामना न करना पड़े।
निष्कर्ष
मखदूमपुर गंगा हादसा मानवीय भूल और प्रशासनिक अनदेखी का एक दुखद मिश्रण बनकर सामने आया है। तीन परिवारों ने अपने चिराग खो दिए हैं और चौथे की उम्मीदें भी समय के साथ धुंधली होती जा रही हैं। एनडीआरएफ और पुलिस का सर्च ऑपरेशन सराहनीय है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब हम ऐसी घटनाओं से सीख लेकर अपने घाटों को सुरक्षित बना पाएंगे। गंगा की लहरें जितनी पवित्र हैं, उतनी ही चंचल और खतरनाक भी हो सकती हैं, यह बात हमें कभी नहीं भूलनी चाहिए। प्रियांशु की तलाश जारी है और पूरा जिला प्रशासन इस समय एक ही लक्ष्य पर केंद्रित है। उम्मीद है कि जल्द ही चौथे युवक का भी सुराग मिल जाएगा ताकि उसके परिवार को अंतिम विदाई देने का मौका मिल सके।

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