बागपत समाचार: अधिवक्ता ने तहसीलदार पर डाला डीजल, आत्मदाह का प्रयास
बागपत, यूपी आज लाइव प्रतिनिधि। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मंगलवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब एडीएम न्यायालय के आदेश पर दुकान खाली कराने पहुंचे तहसीलदार और पुलिस टीम के सामने एक अधिवक्ता ने आत्मदाह का प्रयास किया। राष्ट्र वंदना चौक पर हुई इस घटना के दौरान अधिवक्ता ने खुद के साथ-साथ तहसीलदार और दो दरोगाओं समेत सात लोगों पर डीजल छिड़क दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
राष्ट्र वंदना चौक पर वर्षों पुराने विवाद ने लिया हिंसक रूप
बागपत शहर के मुख्य राष्ट्र वंदना चौक पर स्थित एक दुकान को लेकर मालिकाना हक और किराएदारी का विवाद लंबे समय से चल रहा था। यह दुकान शहनाज खुसरो की बताई जा रही है, जिसे वर्ष 1967 में सोमनाथ नामक व्यक्ति को किराए पर दिया गया था। पिछले कई दशकों से चल रहे इस विवाद में शहनाज खुसरो ने वर्ष 2013 में एडीएम न्यायालय में वाद दायर किया था। हाल ही में न्यायालय ने मालिक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एक सप्ताह के भीतर दुकान खाली कराने के सख्त निर्देश जारी किए थे। जब प्रशासन इन आदेशों का पालन कराने मौके पर पहुंचा, तो माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
अधिवक्ता उमेश का आत्मदाह प्रयास और पुलिस के साथ नोकझोंक
प्रशासनिक कार्यवाही के दौरान किराएदार सोमनाथ के बेटे अधिवक्ता उमेश ने मौके पर पहुंचकर जमकर हंगामा शुरू कर दिया। तहसीलदार अभिषेक सिंह और पुलिस टीम के साथ अधिवक्ता की तीखी बहस हुई। विरोध जताते हुए उमेश ने अचानक डीजल की बोतल निकालकर अपने ऊपर उड़ेल ली। जब पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने और माचिस छीनने की कोशिश की, तो छीना-झपटी में डीजल तहसीलदार अभिषेक सिंह, दरोगा सारिक, मनजीत और सिपाही संदीप समेत कुल सात लोगों के ऊपर जा गिरा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए माचिस को कब्जे में लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
जलती भट्ठी बन सकती थी बड़े हादसे का सबब
घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, जिस दुकान (ढाबे) को खाली कराया जा रहा था, वहां आमतौर पर भट्ठी जलती रहती थी। राहत की बात यह रही कि जिस समय अधिवक्ता ने डीजल छिड़का, उस वक्त भट्ठी बंद थी। यदि वहां आग जल रही होती, तो डीजल के कारण भयंकर आग लग सकती थी और कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। पुलिस ने इस मामले में अधिवक्ता उमेश और ढाबा संचालक विक्की समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। इस दौरान अधिवक्ता के परिजनों और पुलिस के बीच भी काफी धक्का-मुक्की और नोकझोंक देखने को मिली।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और भविष्य के कदम
हंगामे के बावजूद तहसीलदार अभिषेक सिंह ने पीछे हटने के बजाय विधिक कार्यवाही जारी रखी। राष्ट्र वंदना चौक पर दुकानों को सील करने के बाद टीम मेरठ रोड पहुंची, जहां मामूली विरोध के बीच दूसरी दुकान को भी खाली करा लिया गया। तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन अब हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की हिंसक घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
निष्कर्ष
बागपत की यह घटना दर्शाती है कि संपत्ति विवादों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना कितना अनिवार्य है। हालांकि भावनाएं जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन कानून हाथ में लेना और आत्मदाह जैसे कदम उठाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। प्रशासन की मुस्तैदी ने एक बड़े अनर्थ को होने से रोक लिया, लेकिन इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को सौंपने की तैयारी में है।

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