Iran War: 'यह हमारी जंग नहीं', ईरान युद्ध पर ब्रिटेन ने झटका ट्रंप का हाथ, होर्मुज संकट पर बुलाई 35 देशों की बैठक


Iran War: 'यह हमारी जंग नहीं', ईरान युद्ध पर ब्रिटेन ने झटका ट्रंप का हाथ, होर्मुज संकट पर बुलाई 35 देशों की बैठक

लंदन, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की संभावनाओं के बीच ब्रिटेन ने इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य सहयोग की अपील के बावजूद, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के किसी भी आक्रामक सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कड़े शब्दों में कहा कि यह ब्रिटेन की लड़ाई नहीं है और वे अपने देश को इस संघर्ष की आग में नहीं झोंकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ब्रिटेन का सख्त स्टैंड

ब्रिटेन का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब नाटो (NATO) के अन्य सहयोगी राष्ट्रों की ओर से लंदन पर इस जंग में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा था। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस दबाव को दरकिनार करते हुए स्पष्ट किया कि वह ब्रिटिश सेना को किसी ऐसे अभियान में शामिल नहीं होने देंगे जिससे देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। उन्होंने कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 35 देशों की 'महाबैठक'

युद्ध के कारण प्रभावित हुए वैश्विक व्यापार मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित बनाने के लिए ब्रिटेन ने अब नेतृत्व संभालने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि इसी सप्ताह ब्रिटेन 35 देशों की एक उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी करेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक की कमान ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर के हाथों में होगी। इस चर्चा का मुख्य एजेंडा उन कूटनीतिक रास्तों की तलाश करना है जिससे होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही को निर्बाध बनाया जा सके और वहां फंसे नाविकों व रसद को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

कूटनीतिक संतुलन: सैन्य ठिकानों पर लगाई सख्त शर्तें

यद्यपि ब्रिटेन ने सीधी जंग से दूरी बनाई है, लेकिन उसने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। ब्रिटिश सरकार ने साइप्रस स्थित अपने 'आरएएफ अक्रोतिरी' (RAF Akrotiri) सैन्य ठिकाने के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को दी है, लेकिन इसके साथ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि इस ठिकाने का उपयोग केवल रक्षात्मक कार्यों, जैसे मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में नष्ट करने के लिए ही किया जा सकेगा। किसी भी प्रकार के आक्रामक हमले के लिए ब्रिटिश जमीन का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।

ट्रंप की नाराजगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

ब्रिटेन के इस स्वतंत्र और कड़े रुख से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाखुशी जाहिर की है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल पर शर्तें लगाना दोनों देशों के ऐतिहासिक 'विशेष संबंधों' में तनाव पैदा कर सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री स्टार्मर का मानना है कि यदि ब्रिटेन इस युद्ध में गहराई से उतरता है, तो स्वेज नहर और होर्मुज जैसे व्यापारिक मार्गों पर तनाव बढ़ेगा, जिससे ब्रिटेन में ईंधन की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं। वर्तमान में ब्रिटिश सरकार ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और सामरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है।

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