USA-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में जंग का एक महीना, जानें ईरान को कितना नुकसान और अमेरिका की कहाँ फंसी जान



USA-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में जंग का एक महीना, जानें ईरान को कितना नुकसान और अमेरिका की कहाँ फंसी जान

नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध छेड़े गए सैन्य अभियान को एक माह का समय बीत चुका है। इस एक महीने की अवधि में समूचे क्षेत्र का भौगोलिक और रणनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। युद्ध की विभीषिका के कारण मृतकों और घायलों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसका प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए दोनों ही पक्ष युद्धविराम के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं, जिससे आने वाले समय में संकट और गहराने की आशंका है।

प्रथम सप्ताह: शीर्ष नेतृत्व का पतन और युद्ध का विस्तार

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध के शुरुआती सात दिनों में ईरान को बड़ा रणनीतिक झटका लगा। इस्राइली और अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित आईआरजीसी के कई शीर्ष कमांडर मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित कर दिया। इसी दौरान हिजबुल्ला की सक्रियता से युद्ध लेबनान तक फैल गया। राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घरेलू स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा, क्योंकि इस युद्ध के लिए कांग्रेस की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। पहले सप्ताह के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं।

द्वितीय सप्ताह: 'काली बारिश' और नेतृत्व का नया स्वरूप

युद्ध के दूसरे हफ्ते में हवाई हमलों की तीव्रता और बढ़ गई। तेहरान के तेल डिपो पर हुए हमलों के बाद शहर में 'काली बारिश' दर्ज की गई। ईरान ने अटूट संकल्प दिखाते हुए मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया, जिन्होंने अमेरिका के खिलाफ जंग जारी रखने की कसम खाई। इसी दौरान इराक में एक अमेरिकी ईंधन विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें चालक दल के सभी सदस्य मारे गए। मानवीय दृष्टि से लेबनान में विस्थापितों की संख्या 8 लाख के पार पहुँच गई और इस्राइली हमलों में मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा।

तृतीय सप्ताह: परमाणु ठिकानों पर हमला और ऊर्जा संकट

तीसरे सप्ताह में संघर्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक भीषण ऊर्जा युद्ध में बदल गया। इस्राइल ने ईरान के दक्षिण पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, तो जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान एलएनजी संयंत्र को निशाना बनाया। इस जवाबी कार्रवाई से कतर की 17 प्रतिशत एलएनजी उत्पादन क्षमता नष्ट हो गई। आर्थिक रूप से इसका असर अमेरिका और भारत जैसे देशों पर पड़ा, जहाँ पेट्रोल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। इसी बीच अमेरिका के आतंकवाद निरोधी केंद्र के निदेशक ने युद्ध नीति के विरोध में इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी।

चतुर्थ सप्ताह: कूटनीतिक गतिरोध और लंबी जंग के संकेत

एक महीना पूरा होते-होते यह स्पष्ट हो गया कि यह संघर्ष लंबा खिंचने वाला है। अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। इस्राइल ने लेबनान की लिटानी नदी तक अपनी सीमा विस्तार के संकेत दिए, जो एक नए क्षेत्रीय कब्जे की ओर इशारा करता है। हूती विद्रोहियों ने भी युद्ध में कूदने की चेतावनी दी है। एक महीने के अंत तक ईरान में मृतकों की संख्या 2,000 के करीब पहुँच गई है और वैश्विक तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर को छू चुकी हैं।

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