US 'No Kings' Protest: ट्रंप की ईरान नीति और महंगाई के खिलाफ अमेरिका में भारी जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे लाखों लोग


US 'No Kings' Protest: ट्रंप की ईरान नीति और महंगाई के खिलाफ अमेरिका में भारी जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे लाखों लोग

वाशिंगटन, एजेंसी। पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने अब वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह युद्ध समय के साथ और भी अधिक भयावह रूप अख्तियार करता जा रहा है, जिसका सीधा असर अब अमेरिका की आंतरिक राजनीति और सड़कों पर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां इजरायल और अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन्स से पलटवार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के भीतर ही सरकार की नीतियों के खिलाफ विद्रोह के स्वर तेज हो गए हैं। इस संघर्ष के 30वें दिन में प्रवेश करने के साथ ही पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और इसी बीच शनिवार को अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध नीति के खिलाफ विशाल 'नो किंग्स' प्रदर्शन आयोजित किया गया।

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में लाखों की संख्या में नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर अपना रोष प्रकट किया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति को निशाने पर लिया, बल्कि देश में बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ छिड़े युद्ध के खिलाफ भी जोरदार आवाज उठाई। यह विरोध प्रदर्शन अमेरिका के लगभग सभी बड़े शहरों और छोटे कस्बों में देखा गया, जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही विचारधारा वाले राज्यों के लोगों ने एकजुट होकर शिरकत की।

न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को में प्रदर्शनकारियों का सैलाब

अमेरिका के प्रमुख महानगरों में विरोध की लहर सबसे अधिक प्रभावी दिखी। न्यूयॉर्क सिटी में प्रदर्शनकारियों का एक विशाल हुजूम मिडटाउन मैनहटन से मार्च निकालता हुआ नजर आया। इस दौरान लोग ट्रंप प्रशासन की नीतियों, आप्रवासन मुद्दों और ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के विरोध में तख्तियां लहरा रहे थे। प्रदर्शन के दौरान संगीत और नृत्यों के माध्यम से भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की गई। इसी तरह का नजारा सैन फ्रांसिस्को में भी देखने को मिला, जहां एम्बारकाडेरो प्लाजा से सिविक सेंटर तक मार्च निकाला गया। यहां प्रदर्शनकारी अमेरिकी झंडे के साथ-साथ यूक्रेन के समर्थन और ट्रांसजेंडर अधिकारों जैसे विभिन्न सामाजिक आंदोलनों के बैनर लेकर भी चल रहे थे।

सेंट पॉल और मिनेसोटा में रैलियों ने पकड़ा जोर

विरोध प्रदर्शनों का एक बड़ा केंद्र मिनेसोटा का सेंट पॉल इलाका रहा, जहां आयोजित एक विशाल रैली ने सबका ध्यान खींचा। इस रैली में प्रसिद्ध रॉक कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपनी प्रस्तुति दी और मिनेसोटा के जज्बे को पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बताया। इस दौरान जनवरी में फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स की कार्रवाई में जान गंवाने वाले एलेक्स प्रेट्टी और रिनी गुड को भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। कार्यक्रम में मौजूद मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने भी संघीय इमिग्रेशन नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने स्थानीय समुदाय के साहस की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि जनता अब सरकार की वर्तमान दिशा से खुश नहीं है।

अमेरिका में 'नो किंग्स' प्रदर्शन की तीसरी लहर और आर्थिक कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में वर्तमान में हो रहा यह 'नो किंग्स' प्रदर्शन दरअसल असंतोष की तीसरी बड़ी लहर है। इससे पहले भी पिछले एक साल के भीतर दो बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें लाखों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि देश की जर्जर होती आर्थिक स्थिति भी है। अमेरिका में लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की आसमान छूती कीमतें और अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। हालांकि, फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच जैसे कुछ स्थानों पर राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों और विरोधियों के बीच हल्की नोकझोंक और मौखिक झड़पें भी देखने को मिलीं, लेकिन व्यापक रूप से यह पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। जनता ने इस प्रदर्शन के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वे सरकार की युद्धोन्मादी नीतियों और आर्थिक विफलताओं के खिलाफ अपनी असहमति जारी रखेंगे।

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