UP Jal Jeevan Mission: लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 26 इंजीनियरों पर गिरी गाज, 12 निलंबित
लखनऊ, एजेंसी। । उत्तर प्रदेश में ‘जल जीवन मिशन’ के तहत चल रहे कार्यों में लापरवाही बरतने पर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना में देरी और अनियमितताओं को लेकर 26 इंजीनियरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसमें 12 को निलंबित किया गया है।
🚰 जल जीवन मिशन में देरी पर सख्त रुख
ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा मिशन मोड में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान कार्यों में लापरवाही सामने आई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों पर निलंबन, कारण बताओ नोटिस और विभागीय कार्रवाई जैसे कदम उठाए गए।
⚖️ 12 इंजीनियर निलंबित, 4 पर जांच के आदेश
सरकार की सख्त नीति के तहत अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजिनियर स्तर के 12 अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
वहीं चार इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच के आदेश दिए गए हैं।
📄 3 को नोटिस, 7 का तबादला
- तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया
- सात इंजीनियरों का तबादला किया गया
- यह हाल के समय में जल निगम में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है
⚠️ सुधार नहीं हुआ तो बर्खास्तगी तय
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कार्य में सुधार नहीं होने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की प्राथमिकता हर ग्रामीण घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
📍 निलंबित अधिकारियों की सूची
कार्रवाई के तहत जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया, उनमें विभिन्न जिलों के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजिनियर शामिल हैं।
इनमें लखीमपुर खीरी, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, बिजनौर, औरैया, हाथरस, आजमगढ़, बरेली, बाराबंकी और कुशीनगर के अधिकारी शामिल हैं।
🔍 4 अधिकारियों पर विभागीय जांच
चार इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। इन पर कार्यों में अनियमितता और देरी के आरोपों की विस्तृत जांच की जाएगी।
🔄 शिकायतों के आधार पर तबादले
शिकायतों के आधार पर सात इंजीनियरों का विभिन्न जिलों में तबादला किया गया है, ताकि कार्यों में तेजी लाई जा सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
📌 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार ‘जल जीवन मिशन’ को प्राथमिकता देते हुए कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना चाहती है। लापरवाही पर की गई यह सख्त कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है।

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