यूपी बिजली कनेक्शन नियम: छोटे दुकानदारों को वाणिज्यिक के बजाय घरेलू श्रेणी में रखने की उठी मांग


यूपी बिजली कनेक्शन नियम: छोटे दुकानदारों को वाणिज्यिक के बजाय घरेलू श्रेणी में रखने की उठी मांग

लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के लाखों छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग और राज्य सरकार से अपील की है कि जो लोग अपने घर के एक छोटे हिस्से में आजीविका के लिए दुकान संचालित कर रहे हैं, उन्हें वाणिज्यिक (Commercial) दर के बजाय घरेलू (Domestic) श्रेणी के बिजली कनेक्शन की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। इस पहल का उद्देश्य उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देना है जो सीमित संसाधनों के साथ अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

सिलाई और किराना जैसे छोटे व्यवसायों के लिए नियमों में शिथिलता की वकालत

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मुद्दे पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 15 से 20 लाख ऐसे घरेलू विद्युत उपभोक्ता हैं, जो अपने घर के ही एक आंशिक हिस्से में छोटी दुकानें चलाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से सिलाई, किराना स्टोर और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे कार्य शामिल हैं। वर्तमान में विद्युत विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियानों के तहत ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन को जबरन वाणिज्यिक श्रेणी में परिवर्तित किया जा रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

बिजली चोरी के मुकदमों और कठोर कार्रवाई पर जताई कड़ी आपत्ति

अवधेश कुमार वर्मा ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर छोटे दुकानदारों के विरुद्ध बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुचित है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में लोग अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए छोटे-छोटे काम घर से ही करते हैं। यदि घर में पहले से ही एक कनेक्शन मौजूद है, तो उसे कमर्शियल श्रेणी में बदलना उन परिवारों के लिए बड़ा वित्तीय संकट पैदा कर रहा है। परिषद का तर्क है कि आजीविका के इन सूक्ष्म साधनों को बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

वर्ष 2019 के लंबित प्रस्ताव पर त्वरित निर्णय लेने की मांग

परिषद अध्यक्ष ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में ही इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। उस समय पावर कॉर्पोरेशन ने सुझाव दिया था कि 2 किलोवाट तक के लोड और 200 यूनिट तक की मासिक खपत वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं को कुछ विशेष शर्तों के साथ घरेलू श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि, कई साल बीत जाने के बाद भी इस पर अभी तक कोई अंतिम और आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग को मिलेगी बड़ी राहत

उपभोक्ता परिषद ने जोर देकर कहा है कि यदि सरकार और नियामक आयोग इस मामले में सकारात्मक निर्णय लेते हैं, तो इससे न केवल लाखों परिवारों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। छोटे व्यापारियों को राहत मिलने से स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और बिजली चोरी के मामलों में भी स्वाभाविक कमी आएगी। परिषद ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस प्रकरण में हस्तक्षेप कर जनहित में आदेश जारी करने का आग्रह किया है।

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