UP News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को हाईकोर्ट से राहत, POCSO केस में गिरफ्तारी पर रोक
लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत प्रदान की है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है।
📌 क्या है पूरा मामला
यह मामला नाबालिगों से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित है, जिसमें प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
📌 हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य स्वामी प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरि और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत की अनुमति दी।
📌 बचाव पक्ष की प्रमुख दलीलें
आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में कई महत्वपूर्ण बातें रखीं:
- आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया
- पीड़ितों का आश्रम से कोई संबंध नहीं होने का दावा
- एफआईआर में देरी और विरोधाभास का मुद्दा उठाया
- मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट प्रमाण न होने की बात कही
- आरोपों को छवि खराब करने की कोशिश बताया
📌 सरकार और याचिकाकर्ता का पक्ष
सरकारी पक्ष और याचिकाकर्ता ने दलील दी:
- आरोप गंभीर और जघन्य प्रकृति के हैं
- पीड़ितों ने अपने बयान में आरोपों की पुष्टि की
- आरोपी प्रभावशाली हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई
📌 कोर्ट ने उठाए महत्वपूर्ण सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई बिंदुओं पर सवाल उठाए:
- एफआईआर दर्ज करने में देरी
- पीड़ितों के बयान में विरोधाभास
- मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट साक्ष्य का अभाव
- घटना के समय एक पीड़ित के बालिग होने की बात
- मीडिया में इंटरव्यू देना नियमों के खिलाफ
📌 कोर्ट का कानूनी दृष्टिकोण
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 29 के तहत दोष का अनुमान चार्ज फ्रेम होने से पहले लागू नहीं होता। इसलिए केवल इसी आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
📌 जमानत की शर्तें
कोर्ट ने आरोपियों को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए कुछ शर्तें लगाईं:
- साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे
- गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे
- कोर्ट में नियमित उपस्थिति देंगे
- बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे
- मीडिया में बयान देने से बचेंगे

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